नईदिल्ली । हाल ही में ग्लेशियर फटने से नेपाल में आई भीषण तबाही के बाद भारत में भी ऐसे ही विनाश की आशंका जताई जा रही है। देश की 40 ग्लेशियल झीलों को संभावित खतरे में बताया है, जिनमें से 7 को अत्यधिक उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। एनडीएमए के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा से सटे भारतीय इलाकों में स्थित ये झीलें कभी भी एक बड़े संकट का कारण बन सकती हैं। नेपाल में हाल ही में हुए ग्लेशियर फटने से 1,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और 4,000 से ज्यादा लापता हो गए थे, जिसने भारत को भी सतर्क कर दिया है। इस भयावह परिदृश्य के मद्देनजर, एनडीएमए ने विशेष रूप से सिक्किम में 40 उच्च-खतरे वाली ग्लेशियल झीलों की पहचान की है, जिनमें से 7 को उच्च जोखिम श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। इन 40 संवेदनशील झीलों में से 16 का वर्गीकरण हो चुका है, जबकि 13 अभी भी वर्गीकृत नहीं हैं।
अधिकारियों ने बताया कि 16 प्राथमिकता वाली संवेदनशील झीलों में से 13 का विस्तृत वैज्ञानिक आकलन किया गया है। इनमें से अधिकांश झीलें लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं। इस संभावित आपदा से बचाव के लिए सिक्किम राज्य ने कई महत्वपूर्ण उपाय प्रस्तावित किए हैं। सिक्किम के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव संदीप तांबे ने बताया कि हालिया आकलन में झीलों की गहराई, पानी की मात्रा, मोरेन की मजबूती और हिमस्खलन व भूस्खलन से होने वाले खतरों की जांच की गई है। प्रमुख उपायों में शाको चू झील में सोलर-पावर्ड पंपों का उपयोग करके जल स्तर को 20 से 40 मीटर तक कम करना शामिल है, जिससे लगभग 80 लाख घन मीटर पानी निकाला जाएगा।
दूसरा प्रस्ताव साउथ-नॉर्थ लोनाक क्लस्टर के लिए है, जहाँ डोलमा संपांग में लगभग 24 किलोमीटर नीचे एक पत्थर-चिनाई वाली रोक संरचना का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि संभावित बाढ़ के बल को कम किया जा सके। तीसरा प्रस्ताव गुरुदोंगमार झील परिसर के लिए है, जहाँ अधिकारी मोरेन प्लग पर एक सुरक्षा दीवार बनाने पर विचार कर रहे हैं, ताकि पवित्र झील को नुकसान पहुंचाए बिना पानी के निकलने को नियंत्रित किया जा सके। इसके अलावा, सिक्किम अपने रियल-टाइम निगरानी और पूर्व-चेतावनी सिस्टम का विस्तार भी कर रहा है। शाको चू, केरांग और डोलमा संपांग में स्वचालित निगरानी स्टेशन पहले से ही कार्यरत हैं, और अधिकारी डॉप्लर वेदर रडार लगाने के लिए जगहों की तलाश कर रहे हैं। राज्य में 400 से अधिक ग्लेशियल झीलें हैं, जिनमें से फिलहाल 16 को अत्यधिक संवेदनशील बताया गया है। यह नवीनतम आकलन अक्टूबर 2023 में हुई भीषण ग्लेशियल झील आउटबर्स्ट बाढ़ के बाद आया है।

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