September 3, 2026

MP के एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा बढ़ी, कैमरे पहले ही पकड़ लेंगे ओवरस्पीड और लापरवाही

भोपाल| दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अब केवल हादसे के बाद राहत कार्य तक सीमित रहने के बजाय, दुर्घटनाओं को होने से पहले ही टालने की व्यापक योजना पर काम शुरू हो गया है। मध्य प्रदेश से गुजरने वाले लगभग 240 किलोमीटर लंबे मार्ग पर बीते तीन सालों में 1300 से अधिक सड़क हादसे दर्ज किए गए हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) निगरानी प्रणाली को बेहद उन्नत बनाने में जुट गया है। इसमें गाड़ियों की रफ्तार पर पैनी नजर रखने से लेकर वाहन चालक को झपकी आने की सूरत में तुरंत सचेत करने जैसे अत्याधुनिक उपाय शामिल हैं।

कैमरे केवल फुटेज रिकॉर्ड नहीं करेंगे, सीधे पुलिस कटेगी चालान

एनएचएआई एक्सप्रेस-वे पर स्थापित कैमरों का सीधा एक्सेस ट्रैफिक पुलिस को देने जा रहा है। अब तक इन कैमरों की फुटेज सीधे पुलिसिया कार्रवाई से जुड़ी नहीं थी। एक्सेस मिलते ही वाहनों की रफ्तार स्वतः रिकॉर्ड होगी और निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करने वालों का मौके पर गाड़ी रोके बिना ऑनलाइन चालान कट जाएगा। कार के लिए 120, बस के लिए 100 और ट्रक के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम सीमा तय की गई है। इसके अतिरिक्त, गलत लेन में वाहन चलाने और अचानक लेन बदलने वाले ड्राइवरों की पहचान कर उन पर भी शिकंजा कसा जाएगा।

लंबी दूरी के सफर में चालक की नींद बनेगी चेतावनी का आधार

सड़क का ढांचा ऐसा है कि काफी दूर तक मार्ग बिल्कुल सीधा और खाली रहता है, जिससे लंबे समय तक गाड़ी चलाते वक्त थकान और नींद आने का खतरा बढ़ जाता है। एनएचएआई और निर्माण एजेंसियां अब एक ऐसे विशेष डिजिटल अलर्ट सिस्टम पर काम कर रही हैं, जो ड्राइवर की सतर्कता कम होते ही या नींद की झपकी आते ही अलार्म बजाकर उसे सावधान कर देगा।

सड़क पर मौजूद सुरक्षा का विशाल तंत्र

वर्तमान में इस कॉरिडोर पर आपात स्थिति से निपटने के लिए 25 एम्बुलेंस, 27 क्रेन और 27 पेट्रोलिंग वाहन तैनात हैं। इसके साथ ही पूरे मार्ग पर 901 पीटीजेड कैमरे, 810 एएनपीआर कैमरे, 160 रडार, 150 एक्टिव स्पीड डिस्प्ले और 262 वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम स्थापित हैं। अब इन संसाधनों का मुख्य उद्देश्य केवल दुर्घटना के बाद मदद पहुंचाना नहीं, बल्कि संभावित खतरे को समय रहते भांपकर चालकों पर तुरंत दंडात्मक कार्रवाई करना होगा।

मध्य प्रदेश के हिस्से में 80 लोगों ने गंवाई जान

विगत तीन वर्षों में मध्य प्रदेश के 240 किलोमीटर के दायरे में हुए हादसों में करीब 80 लोगों की अकाल मृत्यु हुई है, जबकि 2000 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पूरे दिल्ली-मुंबई मार्ग पर इसी समय अवधि के दौरान लगभग 400 लोगों की जान जा चुकी है। जांच में अत्यधिक रफ्तार, गलत दिशा में ओवरटेकिंग और गाड़ी चलाते समय नींद आ जाना ही तबाही के मुख्य कारण पाए गए हैं।