September 3, 2026

GDP की तेज रफ्तार से भारत ने दुनिया को चौंकाया, सीतारमण बोलीं- संकट में भी कायम मजबूती

न्यूयॉर्क। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक और वित्तीय अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी सुदृढ़ता और मजबूती का शानदार परिचय दिया है। अमेरिका के आधिकारिक दौरे पर पहुंचीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक निवेशकों को संबोधित करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की विकास दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। भारतीय वाणिज्य दूतावास और बैंक ऑफ अमेरिका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित उच्चस्तरीय बिजनेस राउंडटेबल में उन्होंने इसे विपरीत वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की उल्लेखनीय आर्थिक उपलब्धि करार दिया।

नीतिगत सुधारों से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा

वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत में लगातार लागू किए जा रहे ढांचागत और विनियामक सुधारों से विदेशी निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल पहले से कहीं अधिक पारदर्शी व सुगम हुआ है। दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) जैसे ऐतिहासिक कदमों ने कानूनी प्रक्रियाओं को स्पष्ट बनाया है, जिससे कंपनियों पर कागजी औपचारिकताओं का बोझ घटा है। बीते एक दशक में केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में नियमों का सरलीकरण और कारोबार की सुगमता शीर्ष पर रही है, जिसका सीधा असर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर दिख रहा है।

बुनियादी ढांचा, एआई और मैन्युफैक्चरिंग पर विशेष ध्यान

सीतारमण ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के समक्ष सरकार के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत इस समय कैपिटल एसेट्स के निर्माण, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), अत्याधुनिक डेटा सेंटर्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के विकास को तेजी से गति दे रहा है। इसके साथ ही सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए आसान ऋण व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। बैंकिंग प्रणाली में एनपीए में आई भारी गिरावट ने देश के वित्तीय तंत्र को विस्तार और नए निवेश के लिए मजबूत आधार प्रदान किया है।

राजकोषीय अनुशासन और 'विकसित भारत 2047' का संकल्प

महामारी के बाद के दौर का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत ने हमेशा वित्तीय अनुशासन और संतुलित राजकोषीय प्रबंधन को प्राथमिकता दी है। आज केंद्र और राज्यों के बीच अधिक से अधिक पूंजी निवेश आकर्षित करने को लेकर एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। यह समग्र आर्थिक प्रगति देश को 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर कर रही है।

नैस्डैक में भारत का परचम, तकनीकी साझेदारी पर बल

राउंडटेबल बैठक में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार की सराहना की। इससे पूर्व न्यूयॉर्क स्थित स्टॉक एक्सचेंज नैस्डैक में भारत की ओर से ओपनिंग बेल बजाते हुए उन्होंने कहा कि देश में जारी डिजिटल क्रांति, उद्यमिता और प्रतिभाशाली युवा कार्यबल विकास की नई पटकथा लिख रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि उन्नत प्रौद्योगिकी, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और कुशल पेशेवरों के आदान-प्रदान के जरिए भारत और अमेरिका अपने द्विपक्षीय व्यापारिक व निवेश संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं।