August 25, 2026

साफ हवा के लिए सामूहिक पहल जरूरी, उद्योग और शिक्षा जगत के साथ युवाओं ने बढ़ाया कदम

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज (डीडीयूसी) और मॉर्निंग स्प्राउट कंसल्टिंग द्वारा आयोजित 'नेक्स्ट जेन भारत 2026' सम्मेलन में उद्योग जगत, शिक्षा क्षेत्र और युवाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में ऊर्जा, फार्मा, हॉस्पिटैलिटी, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप्स और शिक्षा क्षेत्रों के प्रमुख वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ वायु सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया।

वायु गुणवत्ता का अर्थव्यवस्था और उत्पादकता पर प्रभाव

सम्मेलन में उपस्थित हितधारकों ने रेखांकित किया कि वायु गुणवत्ता केवल जनस्वास्थ्य तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध देश की अर्थव्यवस्था, कर्मचारियों की उत्पादकता और दैनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं से है। वक्ताओं ने कहा कि एक स्वस्थ कार्यबल ही देश के सतत और आर्थिक विकास को गति दे सकता है।

युवाओं की भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन पर जोर

दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेजेज, मुख्य अतिथि प्रो. बलराम पाणि ने युवाओं से इस चुनौती के समाधान के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

  • शिक्षा जगत की भूमिका: डीडीयूसी के प्रिंसिपल प्रो. हेम चंद जैन ने रीसायकल और रियूज की आदतों को अपनाकर ग्रह-सकारात्मक कदम उठाने पर बल दिया।

  • सामूहिक जिम्मेदारी: मॉर्निंग स्प्राउट कंसल्टिंग की संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक श्वेता ठाकुर नंदा ने कहा कि केवल जागरूकता से काम नहीं चलेगा, बल्कि युवाओं को समाधानों में सक्रिय भागीदार बनना होगा।

  • उद्योग जगत का दृष्टिकोण: मैनकाइंड फार्मा के ग्लोबल सीएचआरओ प्रतीक दुबे ने स्वच्छ वायु को मानव क्षमता और उत्पादकता में निवेश करार दिया।

प्रिंसिपल्स राउंड टेबल और भविष्य की दिशा

सम्मेलन का मुख्य आकर्षण 'प्रिंसिपल्स राउंड टेबल' रहा, जिसमें मोतीलाल नेहरू कॉलेज (इवनिंग) के प्रो. संदीप गर्ग, श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स की प्रो. कवल गिल और भगिनी निवेदिता कॉलेज की प्रो. रुबी मिश्रा ने हिस्सा लिया।

इस चर्चा में शैक्षणिक संस्थानों द्वारा छात्रों के भीतर पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता, नागरिकता और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया गया। दिल्ली नगर निगम की काउंसलर शशि यादव ने भी नवाचार और एकीकृत प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।