August 24, 2026

संस्कृत श्लोक के जरिए पीएम मोदी ने दिया जीवन मंत्र, करुणा-संतोष पर जोर

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए जीवन में सफलता, आत्म-सम्मान और स्थायी प्रसन्नता के लिए करुणा, संतोष और पुरुषार्थ को अनिवार्य स्तंभ बताया है। उन्होंने कहा कि दूसरों के प्रति दया भाव रखने से समाज में आपसी सहयोग और सद्भाव की नींव मजबूत होती है।

सुभाषित के माध्यम से जीवन मूल्यों का संदेश

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के साथ संस्कृत श्लोक “कारुण्येनात्मनो मानं तृष्णां च परितोषतः। उत्थानेन जयेत्तन्द्रीं वितर्कं निश्चयाज्जयेत्॥” साझा किया। इसका भावार्थ यह है कि व्यक्ति को करुणा के जरिए आत्म-सम्मान और संतोष के माध्यम से अपनी असीम इच्छाओं पर नियंत्रण प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त, पुरुषार्थ से आलस्य को परास्त किया जा सकता है और दृढ़ संकल्प से सभी अनिश्चितताओं एवं आधारहीन तर्कों को समाप्त किया जा सकता है।

लोक कल्याण और निःस्वार्थ सेवा पर जोर

इससे पूर्व भी प्रधानमंत्री ने सुभाषितों के जरिए समाज सेवा का संदेश दिया था। उन्होंने नदियों के अनवरत प्रवाह का उदाहरण देते हुए कहा था कि जिस प्रकार नदियां बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के मानव जीवन और प्रकृति का पोषण करती हैं, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपनी क्षमताओं और जीवन का उपयोग लोक कल्याण तथा निःस्वार्थ सेवा के लिए करना चाहिए।

विपरीत परिस्थितियों में धैर्य रखने की सीख

संकट के समय में धैर्य और उत्साह बनाए रखने पर बल देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य श्लोक के माध्यम से संदेश दिया था कि ज्ञानी पुरुष कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों के बावजूद अपना मनोबल नहीं खोते। प्रधानमंत्री द्वारा लगातार साझा किए जा रहे ये विचार न केवल व्यक्तिगत विकास को प्रेरित करते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मकता और उच्च नैतिक मूल्यों को भी बढ़ावा देते हैं।