August 18, 2026

संसदीय बोर्ड में योगी या फडणवीस? BJP के अगले बड़े संगठनात्मक फैसले पर निगाहें

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी द्वारा अपने नए सांगठनिक ढांचे का एलान किए जाने के बाद अब सबका ध्यान पार्टी की सर्वोच्च नीति-निर्धारक इकाई, यानी संसदीय बोर्ड के पुनर्गठन पर टिक गया है। सत्ता और संगठन के बीच संतुलन साधने वाली इस सबसे शक्तिशाली समिति में किसे जगह मिलेगी, इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या इस बार किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को इस शीर्ष बोर्ड में शामिल किया जाएगा।

संसदीय बोर्ड में जगह मिलने का सियासी महत्व

पार्टी संगठन में संसदीय बोर्ड का स्थान सबसे ऊंचा माना जाता है, जहाँ देश और पार्टी से जुड़े बड़े फैसले लिए जाते हैं। भूतकाल में मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान जैसे दिग्गज नेता इस बोर्ड का हिस्सा रह चुके हैं। हालांकि, वर्तमान में कोई भी सेवारत मुख्यमंत्री इसमें शामिल नहीं है, जिससे आने वाले फैसलों को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है।

शीर्ष स्थान की रेस में दो बड़े नाम

संसदीय बोर्ड के संभावित नामों में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। योगी आदित्यनाथ अपनी अपार लोकप्रियता, मजबूत जनसमर्थन और स्टार प्रचारक की छवि के कारण एक बड़े दावेदार माने जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, देवेंद्र फडणवीस को उनके बेहतरीन चुनावी प्रबंधन, रणनीतिक कौशल और हालिया चुनावों में पार्टी की मजबूत वापसी कराने के लिए जाना जाता है। एक तरफ जहाँ व्यापक जनाधार है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और रणनीतिक अनुभव, जिससे शीर्ष नेतृत्व का फैसला बेहद अहम होगा।

केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट

संगठन विस्तार के बाद अब मोदी सरकार के मंत्रिपरिषद में भी बदलाव और विस्तार की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में केंद्रीय मंत्रिमंडल में नए चेहरों को मौका मिल सकता है, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल किया जा सकता है। संगठन में नई जिम्मेदारियां मिलने और कुछ खाली पड़े पदों के चलते इस फेरबदल को जल्द ही अंतिम रूप दिया जा सकता है।