पुलिस विभाग में हड़कंप, IPS अधिकारी ने ASI समेत चार जवानों पर गिराई गाज

डीग। राजस्थान के डीग जिले में अवैध खनन पर लगाम कसने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष अभियान के बीच पुलिस महकमे में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। कामां थाने में पदस्थ एक सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) सहित तीन आरक्षकों पर अवैध खनन में संलिप्तता और संरक्षण देने के गंभीर आरोपों के चलते निलंबन की गाज गिरी है। जिला पुलिस अधीक्षक कांबले शरण गोपीनाथ ने प्राथमिक स्तर पर प्राप्त शिकायतों और साक्ष्यों की समीक्षा करने के पश्चात यह अनुशासनात्मक आदेश जारी किया है। इस कड़े कदम से पुलिस प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच में दोष सिद्ध होने पर संबंधित कर्मियों के खिलाफ विभागीय व सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

प्रारंभिक शिकायतों और जांच के आधार पर देर रात जारी हुए निलंबन आदेश

प्रशासनिक स्तर से प्राप्त जानकारी के अनुसार एएसआई पूरन सिंह, कांस्टेबल चंद्रशेखर, कांस्टेबल विक्रम सिंह और कांस्टेबल प्रशांत को रविवार देर रात तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। जिला पुलिस प्रमुख ने बताया कि क्षेत्र में अवैध खनन की गतिविधियों में संदिग्ध भूमिका और कर्तव्य पालन में लापरवाही की शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही थीं। इन शिकायतों की निष्पक्षता से पड़ताल के लिए प्राथमिक विभागीय जांच शुरू की गई है। विस्तृत जांच रिपोर्ट आने तक चारों पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर रखते हुए निलंबन अवधि में नियमानुसार भत्ता प्रदान किया जाएगा।

भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता पर जीरो टॉलरेंस नीति, संरक्षण देने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जिले में अवैध खनन, भ्रष्टाचार या किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग में जीरो टॉलरेंस की नीति लागू है और अवैध गतिविधियों में शामिल या उन्हें संरक्षण देने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। इस कार्रवाई को डीग जिले में खनन माफियाओं के नेटवर्क को तोड़ने और पुलिस तंत्र में शुचिता लाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम माना जा रहा है।

जांच के दायरे में आ सकते हैं कई अन्य कर्मचारी, पूरे घटनाक्रम पर पुलिस मुख्यालय की नजर

कामां क्षेत्र में हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद जांच का दायरा विस्तृत कर दिया गया है। मामले की गहन पड़ताल के दौरान अन्य संबंधित पुलिस अधिकारियों अथवा कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका उजागर होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। यदि जांच में अन्य किसी की भी मिलीभगत पाई जाती है तो उन पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है। फिलहाल जिला पुलिस महकमा पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखे हुए है और पारदर्शी जांच प्रक्रिया सुनिश्चित की जा रही है।