गाजा पर भारत के रुख को लेकर सोनिया गांधी का आर्टिकल, BJP ने साधा तीखा निशाना

नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने गाजा पट्टी में जारी मानवीय संकट पर केंद्र की मोदी सरकार के रुख को लेकर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने एक लेख के माध्यम से आरोप लगाया कि भारत सरकार फिलिस्तीन के न्यायसंगत अधिकारों के समर्थन की अपनी दशकों पुरानी ऐतिहासिक और पारंपरिक नीति को दरकिनार कर रही है और वर्तमान में इजरायल के साथ द्विपक्षीय संबंधों को अनुचित प्राथमिकता दी जा रही है। सोनिया गांधी के अनुसार, गाजा संकट के प्रति भारत का यह बदला हुआ नजरिया देश की दीर्घकालिक विदेश नीति की प्रासंगिकता और दिशा पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है।

गाजा में मानवीय त्रासदी और वैश्विक चुप्पी पर चिंता

सोनिया गांधी ने वैश्विक संस्थाओं की रिपोर्टों का हवाला देते हुए लिखा कि गाजा में जारी सैन्य संघर्ष ने अभूतपूर्व तबाही मचाई है, जिसकी सबसे बड़ी कीमत वहां के निर्दोष और आम नागरिकों को चुकानी पड़ रही है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के जरिए रेखांकित किया कि इस युद्ध में अब तक 20 हजार से अधिक मासूम बच्चों की असमय मौत हो चुकी है, जबकि 44 हजार से ज्यादा बच्चे गंभीर रूप से घायल और अपाहिज हुए हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की विफलता पर भी गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर मिल रहे साक्ष्यों और अंतरराष्ट्रीय कानूनी अपीलों के बावजूद वैश्विक शक्तियां इस भीषण रक्तपात को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई हैं।

नीतिगत बदलाव से भारत की वैश्विक छवि को नुकसान का दावा

कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार की भूमिका पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि नई दिल्ली ने गाजा के लोगों की इस असीम पीड़ा और मानवाधिकारों के हनन पर रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत हमेशा से ही फिलिस्तीनी नागरिकों के अधिकारों का एक मजबूत और मुखर पैरोकार रहा है, ऐसे में अपनी इस स्थापित कूटनीतिक नीति से पीछे हटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि और साख को गहरी ठेस पहुंचा सकता है। सोनिया गांधी के मुताबिक, इस संवेदनशील विषय पर सरकार की निरंतर खामोशी नैतिक और रणनीतिक, दोनों ही दृष्टिकोण से तर्कसंगत नहीं है और उन्होंने केंद्र से फिलिस्तीन के समर्थन में अपनी आवाज पुनः बुलंद करने का आग्रह किया।

भारतीय जनता पार्टी का पलटवार और वोट बैंक की राजनीति का आरोप

सोनिया गांधी के इन गंभीर आरोपों पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी देश की संवेदनशील विदेश नीति को भी हमेशा अपनी संकीर्ण वोट बैंक की राजनीति के चश्मे से देखती आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने गाजा और फिलिस्तीन के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में युद्ध विराम के प्रस्तावों पर मतदान के दौरान अपना रुख पूरी तरह साफ किया है और युद्धग्रस्त क्षेत्र में लगातार मानवीय एवं चिकित्सा सहायता सामग्री भी भेजी है। भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए ही लंबे समय तक इजरायल के साथ देश के रणनीतिक संबंधों को विकसित नहीं होने दिया और उनकी यह चिंता केवल चुनिंदा वैश्विक मुद्दों पर ही दिखाई देती है।