श्रीगंगानगर। स्थानीय रेलवे स्टेशन पर एक दर्दनाक हादसे का शिकार हुए बांसवाड़ा के छात्र की आखिरकार मौत हो गई। वह पिछले 7 दिनों से लगातार जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा था। इस दौरान उसे बचाने के लिए तीन अलग-अलग शहरों के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़े, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशें और परिजनों की दुआएं भी उसे नहीं बचा सकीं।
इलेक्ट्रिक इंजन पर चढ़ते ही दौड़ा करंट
हादसा 17 जून का बताया जा रहा है। श्रीगंगानगर रेलवे स्टेशन पर एक इलेक्ट्रिक ट्रेन का इंजन खड़ा था। इसी दौरान 22 वर्षीय देवेश कुमार अचानक उस इंजन के ऊपर चढ़ गया। ऊपर से गुजर रही हाई-टेंशन बिजली की लाइन से छूते ही उसे जोरदार करंट लगा और वह बुरी तरह झुलस गया। घटना की भनक लगते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे और झुलसे हुए छात्र को एम्बुलेंस से स्थानीय जिला अस्पताल पहुंचाया।
जिंदगी बचाने के लिए एक से दूसरे शहर दौड़ते रहे परिजन
छात्र की नाजुक हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे बीकानेर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही बदहवास परिजन भी बीकानेर पहुंच गए। वहाँ स्थिति में सुधार न होने पर वे उसे उदयपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल ले गए।
उदयपुर में इलाज के बाद मंगलवार को देवेश की सेहत में सुधार देख डॉक्टरों ने उसे छुट्टी दे दी। परिजन राहत की सांस लेकर अपने बेटे के साथ घर लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में अचानक उसकी तबीयत फिर बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। गमगीन परिजन शव को लेकर बांसवाड़ा के महात्मा गांधी (MG) अस्पताल पहुंचे, जहाँ फिलहाल शव को मोर्चरी में रखवाया गया है।
परिजनों ने की निष्पक्ष जांच की मांग, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
मृतक छात्र की पहचान देवेश (22) पुत्र गणपतलाल के रूप में हुई है, जो कुशलगढ़ के खेरड़ा का निवासी था और श्रीगंगानगर के महर्षि दयानंद बीएड कॉलेज में प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। इस घटना के बाद परिजनों ने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिजनों का कहना है कि रेलवे स्टेशन के इतने संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्र में कोई छात्र इंजन के ऊपर तक कैसे पहुँच गया? इस लापरवाही और हादसे के पीछे की असली वजह सामने आनी चाहिए। कोतवाली थाना पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर आगे की तफ्तीश शुरू कर दी है।

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