लखनऊ। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार से जुड़े जमीन खरीद विवाद ने अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया और बेहद आक्रामक मोड़ ले लिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा मोहन यादव का खुलकर बचाव किए जाने के बाद यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने उन पर पलटवार किया है। राजभर ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट साझा कर अखिलेश यादव और सैफई परिवार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि इस मामले में अखिलेश यादव की घबराहट और बौखलाहट के पीछे करोड़ों रुपये के बेनामी निवेश का छिपा हुआ राज है।
अखिलेश जी! आप इतना शोर मचाकर क्या छिपाना चाहते हैं?
कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अखिलेश यादव को सीधे संबोधित करते हुए तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने लिखा अखिलेश यादव जी, मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री के संबंध में आप इतना हल्ला क्यों मचा रहे हैं? इतना शोर करके आप आखिर क्या छुपाना चाहते हैं? आप ऐसा क्यों चाहते हैं कि दुनिया सिर्फ वही देखे जो आप दिखाना चाहते हैं? अब मैं उत्तर प्रदेश की जनता को बताता हूं कि आपकी असली पीड़ा क्या है और आप क्यों घबरे हुए हैं।"
राजभर ने आरोप लगाया कि जैसे ही मध्य प्रदेश के इस जमीन मामले की परतें खुलीं, वैसे ही अखिलेश यादव के निवेश पर चोट पहुंच गई और इसी वजह से वे पूरी तरह बौखला गए हैं।
एमपी के आईएएस भरत यादव और सपा कोषाध्यक्ष के रिश्ते का पर्दाफाश
राजभर ने अपनी पोस्ट में एक बेहद चौंकाने वाला प्रशासनिक और पारिवारिक कनेक्शन सामने रखा है। उन्होंने दावा किया कि:
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मध्य प्रदेश (एमपी) कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भरत यादव, जो वर्तमान में राज्य सड़क विकास निगम के चेयरमैन हैं, उनसे अखिलेश यादव के बेहद करीबी रिश्ते हैं।
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भरत यादव दरअसल समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष चंद्रपाल यादव के सगे दामाद हैं, जिन्हें राजभर ने अखिलेश यादव का "कुबेर" (वित्तीय रणनीतिकार) बताया है।
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राजभर का आरोप है कि मध्य प्रदेश में नए हाईवे का रूट कहां से गुजरेगा, इसकी पूरी सटीक जानकारी आईएएस भरत यादव के पास होती है, जो सैफई परिवार के बेहद खास हैं।
राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव की तिलमिलाहट साफ बयां कर रही है कि भरत यादव के जरिए उनके और उनके करीबियों के पैसे मध्य प्रदेश की उन जमीनों में भारी मात्रा में निवेश कराए गए हैं, जहां से हाईवे गुजरने वाला है।
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे का जिक्र: 'जमीन खाने में सैफई परिवार अनुभवी'
अखिलेश यादव पर हमला जारी रखते हुए राजभर ने उत्तर प्रदेश के पुराने कार्यकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन 'खाने' के मामले में सैफई परिवार को पुराना और बड़ा अनुभव है, जिसे पूरा उत्तर प्रदेश अच्छी तरह जानता है।
उन्होंने दावा किया कि लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान भी यही खेल खेला गया था। फिरोजाबाद से लेकर इटावा तक सपा नेताओं ने पहले ही औने-पौने दामों पर किसानों से जमीनें खरीद ली थीं। बाद में निजी और पारिवारिक फायदे के लिए एक्सप्रेसवे के रूट को मनमाने तरीके से सैफई गांव की तरफ घुमा दिया गया, जिससे एक्सप्रेसवे की कुल दूरी बेवजह 30 किलोमीटर और बढ़ गई। बाद में उन जमीनों के बदले सरकार से भारी-भरकम मुआवजा वसूला गया।
'गोमती रिवर फ्रंट' के बाद अब एमपी एक्सप्रेसवे रिपोर्ट का डर
ओपी राजभर ने सपा कार्यकर्ताओं पर निशाना साधते हुए लिखा कि गोमती रिवर फ्रंट घोटाले की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद से अखिलेश यादव के मन में एक गहरा डर बैठ गया है। उन्हें डर है कि यदि मध्य प्रदेश की एक्सप्रेसवे लैंड डील की वास्तविक रिपोर्ट सामने आ गई, तो वहां किया गया उनका सारा बेनामी निवेश पूरी तरह डूब जाएगा। राजभर ने देश की केंद्रीय जांच एजेंसियों से मांग की है कि वे इस बात का पता लगाएं कि मध्य प्रदेश के इस जमीन विवाद में उत्तर प्रदेश के कौन-कौन से बड़े सफेदपोश और राजनेता शामिल हैं।
अखिलेश यादव ने किया था मोहन यादव का बचाव; बताया था बीजेपी की साजिश
गौरतलब है कि इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार पर रियल एस्टेट और जमीन खरीद को लेकर कुछ आरोप लगे थे। इस मामले में अचानक कूदते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मोहन यादव का खुलकर समर्थन किया था।
अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आंतरिक साजिश करार देते हुए कहा था कि मोहन यादव को बदनाम करने के लिए खुद बीजेपी के लोगों ने यह जाल बुना है। अखिलेश ने सवाल उठाया था कि क्या बीजेपी को पहले से पता नहीं था कि मुख्यमंत्री बनने से पहले मोहन यादव रियल एस्टेट का कारोबार करते थे?
अखिलेश ने दावा किया था कि, "यह आरोप इसलिए लगाए जा रहे हैं क्योंकि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व राज्यों के मुख्यमंत्री बदलने का बहाना ढूंढ रहा है। वे मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को पद से हटाना चाहते हैं, और इन दोनों को इसलिए हटाया जा रहा है ताकि अंततः वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को उनके पद से हटा सकें।" अब अखिलेश के इसी बयान पर यूपी में नया सियासी घमासान छिड़ गया है।

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