आसमान की ऊंचाइयों को छूने और एविएशन सेक्टर में करियर बनाने का सपना देश के लाखों युवाओं का होता है। एयरलाइंस कंपनियों में पायलट का पेशा न सिर्फ समाज में बेहद सम्मानजनक और विलासिता (लग्जरी) से भरा माना जाता है, बल्कि इसमें मिलने वाली बेहतरीन सैलरी और दुनिया भर की सैर करने का मौका युवाओं को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। हालांकि, देश की राजधानी नई दिल्ली सहित देश-विदेश के किसी भी कोने से इस मुकाम तक पहुंचना इतना आसान नहीं है, क्योंकि इसके लिए कड़ी मेहनत के साथ-साथ एक तय प्रक्रिया और भारी-भरकम खर्च से गुजरना पड़ता है।
पायलट बनने के दो मुख्य रास्ते
एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार, नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में पायलट बनने के मुख्य रूप से दो तरीके होते हैं:
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फ्लाइंग एकेडमी (फ्लाइंग स्कूल): पहला रास्ता यह है कि आप नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से मान्यता प्राप्त किसी भी प्रतिष्ठित उड़ान अकादमी में दाखिला लें। वहां कड़े प्रशिक्षण के बाद पहले प्राइवेट पायलट लाइसेंस (PPL) और फिर कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) हासिल करें।
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कैडेट पायलट प्रोग्राम: दूसरा तरीका यह है कि आप सीधे किसी बड़ी एयरलाइंस कंपनी के 'कैडेट प्रोग्राम' से जुड़ें। इसमें कंपनियां खुद अपने मानकों पर उम्मीदवारों को चुनती हैं और अपनी देखरेख में उन्हें ट्रेनिंग दिलवाती हैं।
अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता और उम्र की सीमा
इस चुनौतीपूर्ण करियर में कदम रखने के लिए उम्मीदवारों को शुरुआती स्तर पर कुछ कड़े मापदंडों को पूरा करना होता है:
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उम्र सीमा: विमान उड़ाने के प्रशिक्षण की शुरुआत के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी अनिवार्य है।
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शैक्षणिक योग्यता: छात्र का किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से भौतिकी (Physics) और गणित (Maths) विषयों के साथ कम से कम 50 प्रतिशत अंकों से 12वीं कक्षा (इंटरमीडिएट) उत्तीर्ण होना आवश्यक है।
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शारीरिक फिटनेस: इसके अलावा, उम्मीदवार का मानसिक और शारीरिक रूप से शत-प्रतिशत तंदुरुस्त होना सबसे पहली शर्त है।
कितने कड़े होते हैं इसके मेडिकल टेस्ट?
कमर्शियल पायलट बनने की यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील पड़ाव मेडिकल जांच का होता है। इसके दो चरण होते हैं, जो डीजीसीए के कड़े नियमों के तहत पूरे किए जाते हैं:
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क्लास 2 मेडिकल सर्टिफिकेट (शुरुआती चरण): किसी भी फ्लाइंग स्कूल में व्यावहारिक ट्रेनिंग शुरू करने से पहले छात्र के पास 'क्लास 2 मेडिकल सर्टिफिकेट' होना अनिवार्य है। यह सर्टिफिकेट डीजीसीए द्वारा अधिकृत डॉक्टरों द्वारा गहन जांच के बाद दिया जाता है, जो यह प्रमाणित करता है कि छात्र विमान उड़ाने का बुनियादी प्रशिक्षण लेने के लिए शारीरिक रूप से पूरी तरह सक्षम है।
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क्लास 1 मेडिकल एग्जाम (अंतिम चरण): कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) प्राप्त करने के लिए 'क्लास 1 मेडिकल सर्टिफिकेट' सबसे जरूरी दस्तावेज है। यह बेहद कड़ा और उच्च स्तरीय टेस्ट होता है, जिसे सीधे भारतीय वायुसेना (IAF) से संबद्ध और मान्यता प्राप्त डॉक्टरों द्वारा डीजीसीए की देखरेख में आयोजित किया जाता है। इस व्यापक जांच में आंखों की रोशनी (विज़न टेस्ट), ईसीजी (हृदय की जांच), संपूर्ण ब्लड टेस्ट, और ईएनटी (नाक, कान, गला) की सूक्ष्म जांच शामिल होती है। इन सभी मानकों पर पूरी तरह खरा उतरने के बाद ही किसी युवा को व्यावसायिक विमान उड़ाने की कानूनी अनुमति मिलती है।

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