जयपुर के जगतपुरा में बन रहा गुप्त वृंदावन धाम मंदिर राजस्थान के सबसे भव्य धार्मिक परिसरों में शामिल होगा. करीब 6 एकड़ क्षेत्र में विकसित हो रहा यह 17 मंजिला मंदिर जयपुर स्थापना की 300वीं वर्षगांठ तक तैयार होने का लक्ष्य रखता है. यहां कृष्ण-बलराम, राधा-श्यामसुंदर और गौरा-निताई की विशाल प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी. मंदिर में 108 फीट चौड़ी और 180 फीट लंबी भव्य कमान छतरी, 70 फीट ऊंचा मयूर द्वार, कृष्ण लीला एक्सपो, हरिनाम मंडप, गीता प्रदर्शनी और आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. एक समय में 4 हजार श्रद्धालु यहां दर्शन कर सकेंगे. परिसर में थिएटर, पुस्तकालय, कन्वेंशन सेंटर, प्रसादम हॉल और 700 कारों की मल्टी-लेवल पार्किंग जैसी सुविधाएं भी होंगी. यह परियोजना धार्मिक पर्यटन को नई पहचान देगी.
जयपुर अपने प्राचीन मंदिरों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यहां ऐसे कई मंदिर हैं, जो हजारों वर्ष पुराने हैं. अब जयपुर में एक और भव्य मंदिर आकार ले रहा है. यह अनोखा मंदिर जगतपुरा स्थित महला रोड, कृष्णा मार्ग पर बन रहा है, जिसे कृष्ण लीला गुप्त वृंदावन धाम मंदिर के नाम से जाना जाएगा. यह मंदिर राजस्थान के सबसे बड़े और भव्य मंदिरों में शामिल होगा. मंदिर का निर्माण विशाल एक्सपो जैसी आधुनिक और भव्य शैली में किया जा रहा है. यह केवल जयपुर ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के लिए एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन आकर्षण बनने की ओर अग्रसर है. वर्तमान में मंदिर का लगभग 60 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य तेजी से जारी है.
आपको बता दें जयपुर के जगतपुरा स्थित कृष्ण लीला गुप्त वृंदावन धाम मंदिर का निर्माण तेजी से जारी है. यह भव्य मंदिर जयपुर स्थापना की 300वीं वर्षगांठ तक बनकर तैयार होगा. करीब 6 एकड़ क्षेत्र में विकसित हो रहा यह मंदिर 17 मंजिला संरचना के रूप में बनाया जा रहा है. वर्तमान में मंदिर का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. मंदिर के पूर्ण होने पर यहां भगवान कृष्ण-बलराम, राधा-श्यामसुंदर और गौरा-निताई की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी. मंदिर का उद्घाटन 12 मई 2027 को प्रस्तावित है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है.
जगतपुरा महला रोड पर बन रहा यह मंदिर राजस्थान का सबसे भव्य मंदिर होगा. मंदिर के 16 फीट ऊंचे स्वर्णाभा युक्त गर्भगृह की नींव में 'राम' नाम लिखी 14 हजार ईंटें लगाई जाएंगी. इसके अलावा मंदिर में 108 फीट चौड़ी और 180 फीट लंबी कमान छतरी का निर्माण किया जाएगा, जो रात के समय प्रोजेक्शन मैपिंग के जरिए आकर्षक रोशनी से जगमगाएगी. मंदिर का 70 फीट ऊंचा मुख्य द्वार जयपुर के सिटी पैलेस स्थित मयूर द्वार की तर्ज पर बनाया जा रहा है. साथ ही राजस्थानी शिल्पकला को प्रदर्शित करती 108 मयूर प्रतिमाएं भी मंदिर परिसर में स्थापित की जाएंगी. मंदिर में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए कृष्ण लीला एक्सपो, हरिनाम मंडप, गीता प्रदर्शनी, प्रसादम हॉल, एजुकेशन हॉल, थिएटर, अंडरग्राउंड पार्किंग, बुक स्टोर, आरओ प्लांट, मेंटेनेंस स्टोर, ग्राउंड फ्लोर कन्वेंशन सेंटर, डाइनिंग हॉल और अन्नदान हॉल जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी. यह मंदिर धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तैयार किया जा रहा है.
गुप्त वृंदावन धाम मंदिर को राजस्थानी संस्कृति और आधुनिक वास्तुकला की थीम पर तैयार किया जा रहा है. मंदिर की दीवारों पर विशेष कांच का उपयोग किया जाएगा, जिससे इसकी भव्यता और आकर्षण और बढ़ेगा. इस मंदिर का डिजाइन प्रसिद्ध आर्किटेक्ट मधु पंडित दास ने तैयार किया है, जो इससे पहले विश्व के सबसे बड़े प्रस्तावित वृंदावन चंद्रोदय मंदिर की डिजाइन भी कर चुके हैं. मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश के लिए 6 भव्य द्वार बनाए जाएंगे, जिनमें सिंह द्वार, व्याघ्र द्वार, हस्ति द्वार और अश्व द्वार प्रमुख होंगे, जबकि मयूर द्वार मुख्य प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया जाएगा. मंदिर में आधुनिक तकनीक का भी व्यापक उपयोग होगा. यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और 3D एनीमेशन तकनीक के माध्यम से धार्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दिखाई जाएंगी. गुजरात के सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर गुप्त वृंदावन धाम मंदिर में भी श्रद्धालु श्रीराम और श्रीकृष्ण से जुड़े विभिन्न उत्सवों और लीलाओं का अनुभव AI आधारित तकनीक के माध्यम से कर सकेंगे. इससे भक्तों को आध्यात्मिकता और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिलेगा.
गुप्त वृंदावन धाम मंदिर केवल एक भव्य मंदिर ही नहीं होगा, बल्कि इसके साथ एक विशाल सांस्कृतिक केंद्र भी विकसित किया जाएगा, जहां श्रद्धालुओं और आगंतुकों के लिए अनेक आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी. मंदिर परिसर में विश्व शांति के लिए हरिनाम जप मंडप बनाया जाएगा, जहां आगंतुक और तीर्थयात्री बड़ी संख्या में बैठकर 108 बार हरिनाम जप कर सकेंगे. इसके अलावा यहां कृष्ण लीला एक्सपो, 800 लोगों की बैठने की क्षमता वाला थिएटर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स, एक समृद्ध पुस्तकालय, श्रीमद्भागवत और भगवद्गीता एक्सपो हॉल जैसी विशेष सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी. साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मल्टी-लेवल कार पार्किंग की व्यवस्था होगी, जहां एक समय में लगभग 700 कारें पार्क की जा सकेंगी. धार्मिक, सांस्कृतिक और आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह परिसर भविष्य में राजस्थान के प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में अपनी अलग पहचान बनाएगा.
जयपुर में गुप्त वृंदावन धाम मंदिर के निर्माण से शहर अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर एक नए केंद्र के रूप में स्थापित होगा. अभी तक जयपुर को मुख्य रूप से किलों, महलों और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है, लेकिन यह भव्य मंदिर राजस्थान में आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन को नई गति प्रदान करेगा. मंदिर परिसर में विकसित किए जा रहे विशाल कन्वेंशन हॉल और 'टेस्ट ऑफ इंडिया' प्रसादम केंद्र से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे. साथ ही पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होने से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा. यह परियोजना न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगी, बल्कि जयपुर की पर्यटन और आर्थिक पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
राजस्थान की राजधानी जयपुर में हरे कृष्ण मूवमेंट द्वारा निर्माणाधीन गुप्त वृंदावन धाम देश के सबसे भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक परिसरों में शामिल होने जा रहा है. इस मंदिर में कृष्ण-बलराम, राधा-श्यामसुंदर और गौरा-निताई की विशाल एवं आकर्षक प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी. मंदिर का डिजाइन इस प्रकार तैयार किया जा रहा है कि एक समय में करीब 4,000 श्रद्धालु एक साथ दर्शन कर सकेंगे. राजस्थानी संस्कृति, पारंपरिक शिल्पकला और आधुनिक वास्तुकला के अनूठे संगम के रूप में विकसित हो रहा यह मंदिर विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित होगा. भव्य संरचना, अत्याधुनिक तकनीक और आध्यात्मिक वातावरण के साथ गुप्त वृंदावन धाम जयपुर को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के साथ वास्तुकला का भी अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करेगा.
गुप्त वृंदावन धाम की सबसे खास विशेषताओं में से एक मंदिर के केंद्र में बनने वाली भव्य कमान छतरी होगी, जो जमीन से लगभग 170 फीट ऊंची होगी. यह छतरी चार से पांच परतों में दिखाई देगी और इसके शीर्ष पर 13 स्वर्ण कलश स्थापित किए जाएंगे. इनमें मध्य का मुख्य कलश लगभग 12 से 15 फीट ऊंचा होगा, जबकि अन्य कलशों की ऊंचाई 10 से 12 फीट के बीच होगी. करीब 30 मीटर लंबी और 108 फीट चौड़ी यह छतरी विश्व के मंदिरों में बनने वाली सबसे बड़ी छतरियों में शामिल होगी. इसकी भव्यता इतनी अद्भुत होगी कि जयपुर एयरपोर्ट से उड़ान भरते या उतरते समय विमान यात्रियों को भी यह स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकेगी. इस छतरी को अत्याधुनिक प्रोजेक्शन मैपिंग तकनीक से सुसज्जित किया जा रहा है. रात के समय इस पर भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम की विभिन्न लीलाओं का जीवंत प्रदर्शन दिखाई देगा. नई पीढ़ी को धर्म और संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और 3D एनीमेशन तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव के साथ आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिलेगा.

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