सवाई माधोपुर | स्थानीय रेलवे स्टेशन पर संचालित एक कैंटीन के संचालक (मैनेजर) ने शासकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के आला अधिकारियों और जवानों पर प्रताड़ना और अमानवीय व्यवहार का बेहद संगीन आरोप लगाया है। पीड़ित का दावा है कि तयशुदा 'महीना' (अवैध वसूली) न देने की एवज में उसे जीआरपी थाने के अंतर्गत आने वाले एक सरकारी आवास पर बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा गया। इतना ही नहीं, मर्यादाओं को तार-तार करते हुए एक अधिकारी पर शराब की बोतल में पेशाब (यूरिन) भरकर जबरन पिलाने का भी सनसनीखेज आरोप है। इस घटनाक्रम के उजागर होते ही महकमे में हड़कंप मच गया है।
जयपुर मुख्यालय में शिकायत, रिश्वत न देने पर लाइसेंस निरस्त करने की धमकी
घटना के संबंध में पीड़ित कैंटीन मैनेजर अजीत सिंह ने जयपुर जीआरपी मुख्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई और लिखित शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने अपनी तहरीर में कमर्शियल मैनेजमेंट इंस्पेक्टर (सीएमआई) रवि मीणा, सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) भवानी शंकर, आरक्षक दिलीप कुमार मीणा और मस्तराम मीणा को नामजद किया है। आरोप के मुताबिक, 26 मई की रात सीएमआई रवि मीणा कैंटीन पर कथित तौर पर मासिक बंधी वसूलने आए थे। जब अजीत सिंह ने असमर्थता जताते हुए कुछ दिनों का वक्त मांगा, तो उन्हें कैंटीन का लाइसेंस रद्द करवाने की धौंस दी गई। इसके बाद उसी रात करीब 11 बजे एएसआई भवानी शंकर ने उन्हें बहला-फुसलाकर सरकारी क्वार्टर पर बुलवाया।
कमरे में बंधक बनाकर की मारपीट, नकदी छीनने का भी आरोप
शिकायत में उल्लेख है कि सरकारी आवास के भीतर मौजूद चारों नामजद पुलिसकर्मियों ने शराब के नशे में धुत होकर अजीत सिंह को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। पीड़ित का आरोप है कि मारपीट के दौरान उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से घोर अपमानित किया गया और जबरन यूरिन पीने पर मजबूर किया गया। इसके अलावा, आरोपियों पर पीड़ित की जेब में रखे 15,700 रुपये नकद भी जबरन निकाल लेने का आरोप है। अजीत सिंह ने बंद कमरे के भीतर से मदद के लिए शोर भी मचाया, लेकिन अंदर से कुंडी बंद होने के कारण कोई उनकी चीखें नहीं सुन सका। डाक्टरी मुआयने में पीड़ित के कान, नाक, गर्दन, पीठ और जांघों पर चोट के गहरे निशान मिले हैं।
मामला दर्ज कर तीन पुलिसकर्मी लाइन हाजिर, कोटा डीएसपी को सौंपी जांच
इस गंभीर मामले को गंभीरता से लेते हुए जीआरपी पुलिस अधीक्षक (अजमेर) ने त्वरित एक्शन लिया है और आरोपी एएसआई भवानी शंकर समेत तीनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर (निलंबित जैसा कदम) कर दिया है। पीड़ित का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद जीआरपी ने आईपीसी की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का जिम्मा जीआरपी कोटा के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) शकील अहमद को सौंपा गया है। जांच अधिकारी का कहना है कि परिवादी के विस्तृत बयान दर्ज किए जा रहे हैं और साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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