भोपाल|मध्यप्रदेश में टीईटी अनिवार्यता को विवाद बढ़ता ही जा रहा है. अगर सरकार ने इस पर कोई संतोषजनक फैसला नहीं लिया जल्द ही ये विवाद बड़े आंदोलन का रुप ले लेगा. प्रदेश के 12 प्रमुख शिक्षक संगठनों ने अलग-अलग विरोध की बजाय एकजुट होकर संयुक्त मोर्चा बना लिया है और सरकार के खिलाफ संगठित लड़ाई छेड़ने की तैयारी कर ली है। इस एकता के साथ अब संघर्ष को व्यापक रूप देने की रणनीति तय की गई है|
अब ये मुद्दा सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं रहा
इन संगठनों का कहना है कि अब ये मुद्दा सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नौकरी की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा हुआ हैं. इसी वजह से सभी संगठन एक मंच पर एकत्रित होकर आवाज बुलंद करेंगे. शिक्षक संगठनों ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आदेश को वापस लेने की मांग की है. भोपाल में हुई बैठक के बाद शिक्षकों ने साफ संकेत दिए हैं कि अब यह लड़ाई आर-पार की होगी|
- 8 से 18 अप्रैल तक आंदोलन की रूपरेखा
- 8 अप्रैल: जिला स्तर पर प्रदर्शन
- 11 अप्रैल: ब्लॉक स्तर पर धरना और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन
- 18 अप्रैल: राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा
- इस दौरान प्रदेशभर के शिक्षक बड़ी संख्या में भोपाल पहुंचकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे.
क्या है विवाद की वजह?
लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश के बाद यह विवाद शुरू हुआ. इस आदेश में कहा गया था कि जिन शिक्षकों की सेवा में 5 बर्ष से अधिक समय बचा है, उन्हें टेट परीक्षा पास करनी पड़ेगी. इसी आदेश को लेकर शिक्षक संगठन विरोध कर रहे हैं|

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