जयपुर|होने वाले चंद्र ग्रहण को देखते हुए विशेष व्यवस्था की गई है।निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 3 मार्च को प्रातः 3 बजे शंखनाद होगा और उसी दिन डोल उत्सव का आयोजन किया जाएगा। चंद्र ग्रहण का स्पर्श सायं 3:20 बजे से होगा तथा मोक्ष 6:47 बजे रहेगा। ग्रहण काल 3:20 बजे से 6:48 बजे तक रहेगा। इस कारण डोल उत्सव के बाद ग्रहण क्रम की सेवा ही संपन्न होगी।युवाचार्य विशाल बावा ने बताया कि पुष्टिमार्गीय परंपरा में डोल उत्सव का मुख्य आधार उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र है और सामान्यतः उत्सव इसी नक्षत्र में मनाया जाता है। किंतु शास्त्रीय मर्यादा के अनुसार यदि फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन किसी क्षेत्र में चंद्र ग्रहण दृश्य हो, तो नक्षत्र की अपेक्षा पूर्णिमा तिथि को प्रधानता दी जाती है। जहां ग्रहण दिखाई देता है, वहां डोल उत्सव पूर्णिमा के दिन ही मनाया जाता है।चूंकि प्रधानपीठ श्रीनाथद्वारा में चंद्र ग्रहण दृश्य होगा, इसलिए यहां डोल उत्सव 3 मार्च 2026 को ही आयोजित किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में ग्रहण दृश्य नहीं होगा, वहां 4 मार्च 2026 को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में डोल उत्सव मनाया जाएगा।
दर्शन व्यवस्था इस प्रकार रहेगी
प्रातः मंगला, श्रृंगार और ग्वाला दर्शन नहीं खुलेंगे।
डोल के तीसरे-चौथे राजभोग दर्शन लगभग 10:30 बजे होंगे।
उत्थापन, भोग, संध्या आरती और शयन दर्शन नहीं खुलेंगे।
ग्रहण का सूतक लगने के कारण राजभोग का सखड़ी प्रसाद गौशाला भेजा जाएगा।
उत्सव के पश्चात ग्रहण क्रम की सेवा होगी।
ग्रहण से संबंधित प्रमुख समय
ग्रहण का वेध: प्रातः 3:52 बजे
ग्रहण का स्पर्श: सायं 3:20 बजे
मध्य/गौदान: सायं 5:04 बजे
मोक्ष: सायं 6:47 बजे
चंद्रोदय: सायं 6:42 बजे
पर्वकाल: 3 घंटे 27 मिनट
दृश्यपर्व: 4 मिनट 26 सेकंड

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