कढ़ी हमारे देश के खान-पान का एक ऐसा पारंपरिक और अभिन्न हिस्सा है, जो लगभग हर भारतीय थाली की शोभा बढ़ाता है। बेसन और मट्ठे (दही) के मेल से तैयार होने वाली कढ़ी का जायका जितना बेमिसाल होता है, देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे बनाने के उतने ही अनोखे अंदाज भी हैं।
अक्सर घरों में एक ही तरह की पकौड़ी वाली कढ़ी बनाई जाती है, जिससे कई बार लोग बोर हो जाते हैं। अगर आप भी अपने दोपहर या रात के भोजन में कुछ नयापन लाना चाहते हैं, तो कढ़ी के कुछ क्षेत्रीय स्वादों को आजमा सकते हैं। यहाँ कढ़ी के 5 लाजवाब विकल्पों और उन्हें तैयार करने के आसान तरीकों के बारे में बताया गया है:
1. एवरग्रीन पकौड़ी वाली कढ़ी
यह कढ़ी का सबसे पुराना और पसंदीदा रूप है, जिसे उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक बड़े चाव से खाया जाता है। दही-बेसन के गाढ़े घोल में डूबी हुई नरम-नरम पकौड़ियां इसका मुख्य आकर्षण होती हैं।
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विधि: दही, बेसन, हल्दी और नमक को मिलाकर एक मखमली घोल तैयार करें और इसे धीमी आंच पर गाढ़ा होने तक उबालें। इसके बाद बेसन के फूले हुए पकौड़े तलकर कढ़ी में डालें। आखिरी में राई, कढ़ी पत्ता, हींग और सूखी लाल मिर्च का देसी घी में तड़का लगाएं और उबले हुए चावल के साथ परोसें।
2. सेहत से भरपूर पालक कढ़ी
यदि आप स्वाद के साथ-साथ सेहत और पोषण का कॉम्बिनेशन ढूंढ रहे हैं, तो पालक कढ़ी एक उत्तम चॉइस है। यह कढ़ी शरीर में आयरन और विटामिंस की कमी को पूरा करने में मददगार है।
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विधि: सामान्य कढ़ी के उबलते समय उसमें बारीक कटी हुई ताजी पालक या पालक की प्यूरी मिला दें। पालक के अच्छी तरह पक जाने पर लहसुन और सूखी लाल मिर्च का छौंक लगाएं। यह कढ़ी खाने में बेहद स्वादिष्ट और सुपाच्य होती है।
3. तीखी और चटपटी राजस्थानी कढ़ी
राजस्थान की यह पारंपरिक कढ़ी बिना पकौड़े के तैयार की जाती है। इसका टेक्सचर थोड़ा पतला होता है, लेकिन स्वाद में यह बेहद चटपटी और तीखी होती है।
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विधि: बेसन और खट्टी छाछ के मिश्रण को अच्छी तरह मथकर कड़ाही में पकने के लिए रख दें। इसमें हींग, मेथी दाना, सौंफ और साबुत गरम मसालों का कड़ा तड़का लगाया जाता है। जयपुर और जोधपुर जैसे शहरों में इसे बाजरे की रोटी या गरमा-गरम खींचू के साथ बड़े शौक से परोसा जाता है।
4. प्रोटीन से भरपूर मूंग दाल मंगौड़ी कढ़ी
अगर आप बेसन की साधारण पकौड़ियों से कुछ अलग हटकर खाना चाहते हैं, तो मूंग दाल की मंगौड़ी वाली कढ़ी एक बेहतरीन विकल्प है। यह खाने में हल्की और प्रोटीन से भरपूर होती है।
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विधि: रात भर भीगी हुई मूंग की दाल को दरदरा पीसकर छोटे-छोटे मंगौड़े (पकौड़े) तल लें। जब कढ़ी उबलकर तैयार हो जाए, तो इन मंगौड़ियों को उसमें डालकर कुछ देर छोड़ दें ताकि वे कढ़ी को सोख लें। इसके बाद जीरे का तड़का लगाकर इसे रोटी के साथ खाएं।
5. खट्टी-मीठी टोमैटो कढ़ी
गर्मियों के मौसम में यह कढ़ी पेट को ठंडक पहुंचाने और मुंह का स्वाद बदलने के लिए एकदम परफेक्ट है। टमाटर की प्यूरी का इस्तेमाल होने के कारण इसका रंग और स्वाद दोनों ही बेहद रिफ्रेशिंग होते हैं।
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विधि: दही-बेसन के घोल को पकाते समय उसमें उबले और पिसे हुए टमाटर का पल्प (प्यूरी) मिला दें। खटास को बैलेंस करने के लिए हल्की सी चीनी या गुड़ का इस्तेमाल करें। तैयार होने पर राई और कढ़ी पत्ते का छौंक लगाएं। इसे मुंबई और पुणे के तटीय इलाकों में चावल के साथ काफी पसंद किया जाता है।

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