नई दिल्ली | दक्षिण दिल्ली के सैदुल्लाजाब इलाके में एक पांच मंजिला इमारत के ढहने के मामले में जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। स्थानीय नागरिक युसूफ खान ने इसी साल मार्च के महीने में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और स्थानीय पुलिस को लिखित शिकायत देकर आगाह किया था कि यह इमारत बेहद जर्जर हो चुकी है और एक तरफ झुक रही है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि अगर इस शिकायत पर समय रहते एक्शन लिया जाता, तो 6 लोगों की जान बचाई जा सकती थी। अब युसूफ खान का वह शिकायत पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने मकान नंबर 145 और खसरा नंबर 261 की बदहाली का साफ जिक्र किया था। पुलिस अब उनका बयान दर्ज करने के लिए उनसे संपर्क साधने की कोशिश कर रही है।
अवैध मंजिलों के बोझ से झुकी 13 साल पुरानी इमारत
पुलिस जांच और पूछताछ में यह बात सामने आई है कि करीब 13-14 साल पुरानी इस कमजोर इमारत पर मार्च के दौरान ही दो नई मंजिलें अवैध रूप से खड़ी कर दी गई थीं। इसके साथ ही छत पर पानी की एक भारी-भरकम अतिरिक्त टंकी भी रख दी गई थी। इस अचानक बढ़े बोझ को इमारत का ढांचा संभाल नहीं सका और वह एक तरफ झुकने लगी। पुलिस की गिरफ्त में आए इमारत के 71 वर्षीय मालिक कर्मवीर जेलदार ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि साल 2012-13 में इस भवन को केवल तीन मंजिला बनाया गया था, लेकिन फरवरी-मार्च 2026 के दौरान इसमें नियमों को ताक पर रखकर दो और मंजिलें जोड़ दी गईं।
हादसे के बाद जागी एमसीडी, 6 अन्य इमारतों को खाली करने का नोटिस
6 मासूम मौतों और भीषण तबाही के तीन दिन बाद आखिरकार नगर निगम की नींद टूटी है। एमसीडी ने अब इलाके में अवैध निर्माणों को चिह्नित करने का काम शुरू किया है। एहतियात के तौर पर घटनास्थल के आस-पास की 6 अन्य इमारतों को तुरंत खाली करने का नोटिस जारी किया गया है, जिसके बाद पुलिस लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर रही है। मंगलवार को जारी एक विस्तृत रिपोर्ट में एमसीडी ने बताया कि सैदुल्लाजाब, साकेत, महरौली, पर्यावरण कॉम्प्लेक्स और फ्रीडम फाइटर्स एन्क्लेव जैसे दक्षिण दिल्ली के कई इलाकों में अब एक विशेष चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। विशेष रूप से ग्राउंड प्लस थ्री (G+3) की तय सीमा से ऊंची बनी इमारतों की जांच होगी और नियमों का उल्लंघन मिलने पर 72 घंटे के भीतर सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बिना अनुमति चल रही थीं व्यावसायिक गतिविधियां, देर से शुरू हो सका राहत कार्य
एमसीडी की शुरुआती जांच में पता चला है कि यह 300 वर्ग मीटर की इमारत एक ऐसी अनधिकृत (अवैध) कॉलोनी में बनी थी, जो नियमितीकरण के लिए चुनी गई 1511 कॉलोनियों की सूची में भी शामिल नहीं है। यहाँ तय मानकों से कहीं ज्यादा निर्माण किया गया था और बिना किसी मंजूरी के व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही थीं। निगम ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि उन्हें 30 मई की शाम 7:55 बजे हादसे की सूचना मिली थी और टीम आधे घंटे में पहुंच गई थी, लेकिन पुलिस घेराबंदी के कारण उन्हें रात 10:30 बजे तक मलबे के पास जाने की अनुमति नहीं मिली। पिछले 42 घंटों से चले इस साझा रेस्क्यू ऑपरेशन में एनडीआरएफ, दमकल विभाग और भारी मशीनों की मदद से मलबे से 24 लोगों को निकाला गया, जिनमें से 18 सुरक्षित हैं (12 घायल अस्पताल में भर्ती हैं) और 6 लोगों की मौत हो चुकी है। अब तक मौके से करीब 80 से 90 ट्रक मलबा हटाया जा चुका है।

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