उम्र बढ़ने के साथ-साथ शरीर का संतुलन कमजोर होना, मांसपेशियों में खिंचाव की कमी और जोड़ों में अकड़न आना एक आम समस्या बन जाती है। छोटी-सी भी असावधानी या पैर फिसलना बुजुर्गों के लिए गंभीर चोट या विकलांगता का कारण बन सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी आगाह कर चुका है कि ढलती उम्र में गिरना चोटिल होने का सबसे बड़ा कारण है। इस समस्या से निपटने के लिए अब आयुष मंत्रालय और हालिया वैज्ञानिक शोधों ने 'योग' को एक बेहद सुरक्षित और असरदार उपाय माना है। रिसर्च के मुताबिक, नियमित योगाभ्यास से ६० वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में शारीरिक संतुलन (बैलेंस) और गतिशीलता (मोबिलिटी) में अभूतपूर्व सुधार देखा गया है, जिससे गिरने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
बुजुर्गों के लिए बेहद फायदेमंद हैं ये ४ आसान योगासन
बुजुर्गों की शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए कुछ बेहद सरल लेकिन प्रभावी आसनों की सलाह दी जाती है, जो पैर, कमर और पीठ की मांसपेशियों को मजबूती देते हैं:
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ताड़ासन (Mountain Pose): यह आसन शरीर को सीधा रखने और रीढ़ की हड्डी को मजबूती देने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। इससे पूरे शरीर का अलाइनमेंट सुधरता है।
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वृक्षासन (Tree Pose): शरीर का संतुलन और एकाग्रता बढ़ाने के लिए यह सबसे कारगर आसन है। शुरुआत में बुजुर्ग इसे किसी दीवार या कुर्सी का सहारा लेकर भी कर सकते हैं।
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भुजंगासन (Cobra Pose): पेट के बल लेटकर किया जाने वाला यह आसन पीठ के निचले हिस्से और रीढ़ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, जिससे झुककर चलने की आदत में सुधार होता है।
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सेतु बंधासन (Bridge Pose): यह आसन कूल्हों और पैरों को ताकत देता है। इसके नियमित अभ्यास से उठने-बैठने और चलने के दौरान शरीर का नियंत्रण बेहतर होता है।
शारीरिक मजबूती के साथ मानसिक आत्मविश्वास में बढ़ोतरी
योग का असर सिर्फ शारीरिक बनावट या ताक़त तक ही सीमित नहीं रहता। ढलती उम्र में अक्सर गिरने के डर से बुजुर्गों में घबराहट और अकेलेपन की भावना आने लगती है, जिससे वे घर से बाहर निकलने या टहलने में भी कतराते हैं। नियमित योग और प्राणायाम से मस्तिष्क में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है, जिससे मानसिक तनाव, डर और एंग्जायटी (घबराहट) कम होती है। जब मन शांत होता है, तो बुजुर्गों का खुद पर आत्मविश्वास लौटता है, जो उन्हें एक आत्मनिर्भर जीवन जीने में मदद करता है।
विशेषज्ञों की राय और आयुष मंत्रालय की सलाह
आयुष मंत्रालय के विशेषज्ञों के अनुसार, बुजुर्गों को बहुत कठिन या थका देने वाले व्यायाम करने की आवश्यकता नहीं है। रोजाना केवल २० से ३० मिनट का हल्का योगाभ्यास भी उनके जीवन की गुणवत्ता को पूरी तरह बदल सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि किसी बुजुर्ग को घुटने, रीढ़ की हड्डी या दिल से जुड़ी कोई गंभीर बीमारी है, तो उन्हें किसी योग्य योग ट्रेनर की देखरेख में या डॉक्टर की सलाह के बाद ही इन आसनों की शुरुआत करनी चाहिए। थोड़ा सा अनुशासन बुजुर्गों को ताउम्र स्वस्थ, सक्रिय और सुरक्षित रख सकता है।

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