November 1, 2026

‘ज्ञानेश कुमार के बिना न मोदी PM बनते, न शाह गृह मंत्री’, राहुल गांधी का बड़ा बयान

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में 'इंडिया' गठबंधन द्वारा आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार, गृह मंत्री अमित शाह तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बेहद तीखे राजनीतिक हमले किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मंच किसी एक राजनीतिक दल या विशिष्ट नेताओं का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं, किसानों और मजदूरों की साझी आवाज है। उन्होंने ऐलान किया कि सत्ता पक्ष के पास चाहे जितना धन, बल और प्रशासनिक शक्तियां हों, परंतु देश में लोकतंत्र और संविधान को किसी भी कीमत पर नष्ट नहीं होने दिया जाएगा क्योंकि भारत का संविधान किसी भी व्यक्ति या सरकार से सर्वोपरि है।

चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाने का गंभीर आरोप

अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने देश की चुनावी प्रणाली पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 के आम चुनावों के उपरांत देश भर की मतदाता सूचियों से लगभग 13.5 करोड़ मतदाताओं के नाम निष्कासित कर दिए गए, जो कि कुल मतदाता वर्ग का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा है। उन्होंने तर्क दिया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में मुख्य प्रतिद्वंद्वियों के मध्य मतों का अंतर मात्र तीन प्रतिशत था, ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किया जाना प्रक्रियात्मक निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं के निष्पक्ष संचालन में ढिलाई के कारण लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हुई है।

संवैधानिक संस्थाओं के स्वायत्त स्वरूप और प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल

कांग्रेस नेता ने देश की प्रमुख प्रशासनिक, न्यायिक और जांच एजेंसियों की स्वायत्तता पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और सत्ताधारी दल ने शिक्षा, स्वास्थ्य, जांच एजेंसियों तथा प्रशासनिक तंत्र पर अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया है। उन्होंने कहा कि जो संस्थाएं मूल रूप से देश के युवाओं और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाई गई थीं, उन पर कुछ ही व्यक्तियों का नियंत्रण हो चुका है। इसके परिणामस्वरूप देश के आम किसानों, मजदूरों और युवाओं को उनके वास्तविक अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं, जबकि गिने-चुने बड़े उद्योगपतियों के हजारों करोड़ रुपये के ऋण माफ किए जा रहे हैं।

सामाजिक समरसता, लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की रक्षा का संकल्प

राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि विपक्ष की यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष या नेताओं के प्रति व्यक्तिगत द्वेष या नफरत पर आधारित नहीं है, बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक आत्मा और संविधान की सुरक्षा का संघर्ष है। महात्मा गांधी के विचारों का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की आवाज को सुनना ही वास्तविक धर्म है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में नफरत के माहौल को समाप्त कर आपसी भाईचारे और मोहब्बत को पुनस्थापित किया जाएगा। यह आंदोलन भारत के बहुलतावादी ढांचे, सामाजिक समरसता और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर जारी रहेगा।