पटना। बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) भी इस सीट पर अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा लिया जाना है, जिसकी औपचारिक घोषणा गुरुवार को होने की संभावना है। पार्टी के इस रुख ने विपक्षी खेमे में बेचैनी बढ़ा दी है।
विपक्ष की आपसी फूट पर नाराजगी
पार्टी के वरिष्ठ नेता राणा रंजीत ने सोशल मीडिया पर अपनी राय साझा करते हुए कहा कि यदि संपूर्ण विपक्ष एकजुट होकर साझा प्रत्याशी उतारता, तो सत्तारूढ़ दल को शिकस्त दी जा सकती थी। परंतु विपक्ष में एकता की कमी दिखी और आरजेडी ने अपना अलग उम्मीदवार घोषित कर दिया, जबकि प्रशांत किशोर की पार्टी भी चुनावी समर में उतर चुकी है। विपक्ष में तालमेल न होने के कारण उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान से मांग की है कि पार्टी को बांकीपुर से अपना उम्मीदवार मैदान में जरूर उतारना चाहिए।
शीर्ष नेतृत्व के फैसले का इंतजार
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन के मुताबिक, बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए कई दावेदारों के बायोडाटा पार्टी को मिले हैं, जिन पर गहन मंथन चल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर बुधवार शाम को राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के साथ महत्वपूर्ण चर्चा होगी। आलाकमान की हरी झंडी मिलते ही गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए पार्टी के आधिकारिक फैसले की घोषणा कर दी जाएगी।
वोट बैंक में सेंधमारी की आशंका
सामाजिक और जातीय ताने-बाने के लिहाज से बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र को वैसे तो कायस्थ बहुल माना जाता है, लेकिन यहां मुस्लिम मतदाताओं की भी अच्छी-खासी तादाद है। आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में करीब 10 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, जबकि यादव मतदाता भी दूसरे नंबर पर मजबूत स्थिति में हैं। यदि ओवैसी की पार्टी यहां अपना प्रत्याशी उतारती है, तो मुख्य रूप से आरजेडी के पारंपरिक वोट बैंक में बिखराव होना तय माना जा रहा है।

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