मुंबई। 1993 के मुंबई सीरियल बम ब्लास्ट और जाने-माने बिल्डर प्रदीप जैन हत्याकांड के दोषी अंडरवर्ल्ड गैंगस्टर अबू सलेम की जेल से रिहाई को लेकर एक नया और पेचीदा कानूनी विवाद सामने आया है। मुंबई की विशेष टाडा (TADA) अदालत के समक्ष यह अहम कानूनी सवाल खड़ा हो गया है कि यदि अबू सलेम कोर्ट द्वारा लगाया गया ₹16.51 लाख का जुर्माना नहीं चुकाता है, तो क्या नियमों के तहत उसे 18 साल और 6 महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी? इस मामले ने नासिक जेल प्रशासन और सलेम दोनों के बीच एक नई कानूनी जंग छेड़ दी है।
जुर्माना बनाम अतिरिक्त सजा का कानूनी पेच
अबू सलेम और नासिक जेल प्रशासन दोनों ही पक्षों ने अब अदालत का दरवाजा खटखटाकर इस स्थिति को स्पष्ट करने की मांग की है। मुख्य विवाद इस बात को लेकर है कि क्या सलेम को सजा के हिस्से के रूप में तय किया गया ₹16.51 लाख का जुर्माना हर हाल में भरना होगा? यदि वह यह राशि नहीं चुकाता है, तो क्या डिफ़ॉल्ट रूप से उस पर 18 साल 6 महीने की अतिरिक्त कैद लागू होगी? या फिर पुर्तगाल के साथ हुए प्रत्यर्पण समझौते के तहत तय की गई अधिकतम 25 साल की सजा की सीमा के कारण यह अतिरिक्त सजा खुद-ब-खुद बेअसर हो जाएगी?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अलग-अलग दावे
नासिक सेंट्रल जेल की हाई-सिक्योरिटी सेल में बंद अबू सलेम का दावा है कि देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने उसके आर्थिक जुर्माने को माफ कर दिया था और उसे भारत में केवल 25 साल की अधिकतम कैद काटनी है, जो साल 2030 में पूरी होने जा रही है। इसके विपरीत, जेल प्रबंधन का तर्क बिल्कुल अलग है। जेल अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के 11 जुलाई, 2022 के ऐतिहासिक फैसले या महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी 14 जुलाई, 2025 के आदेश में कहीं भी अबू सलेम के आर्थिक जुर्माने को माफ करने का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
RTI और अदालती अर्जियों का दौर
सलेम ने जेल से ही सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत बार-बार जेल प्रशासन से पूछा है कि क्या उसके खिलाफ जुर्माने की कोई सजा अभी भी पेंडिंग है। सलेम ने अपनी अर्जी में कहा है, "खुद जेल अधिकारियों को जुर्माने की कानूनी स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है। यह संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है कि वह कैदी को उसकी पूरी सजा की स्थिति बताए। इसलिए मैं अदालत से गुजारिश कर रहा हूं कि वह जेल प्रशासन को निर्देश जारी करे।" इस संबंध में नासिक जेल सुपरिटेंडेंट ने भी 7 जुलाई, 2026 को विशेष अदालत को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा है।
2030 में पूरी हो रही है 25 साल की मियाद
अबू सलेम को भारत और पुर्तगाल सरकारों के बीच हुए द्विपक्षीय प्रत्यर्पण समझौते के तहत 11 नवंबर, 2005 को पुर्तगाल से भारत डिपोर्ट किया गया था। इस संधि की शर्तों के मुताबिक, सलेम को भारत में 25 साल से ज्यादा की सजा नहीं दी जा सकती। जेल प्रशासन ने अदालत को सूचित किया है कि सलेम के खिलाफ चल रहे दो अलग-अलग मामलों की मुख्य सजाएं एक साथ (Concurrently) चल रही हैं और वह 11 नवंबर, 2005 से ही लगातार न्यायिक हिरासत में है। ऐसे में उसकी 25 साल की अवधि साल 2030 में समाप्त हो रही है, लेकिन जुर्माने का यह नया विवाद उसकी समय पर रिहाई में बड़ी अड़चन बन सकता है।

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