सावन पुत्रदा एकादशी कब है? उत्तम संतान की होगी प्राप्ति, श्रीहरि के साथ मिलेगी शिव कृपा, जानें तारीख, मुहूर्त

यदि किसी को उत्तम संतान की प्राप्ति की कामना है तो उसे श्रावण मास में सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत रखना चाहिए. सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत हर साल सावन मा​ह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, लेकिन सावन का महीना है तो इसमें व्रती को श्रीहरि और महादेव दोनों की कृपा प्राप्त होती है. पुत्रदा एकादशी का व्रत साल में दो बार आता है, एक सावन में और दूसरा पौष माह में. आइए जानते हैं कि सावन पुत्रदा एकादशी कब है? पूजा का मुहूर्त और पारण कब है?
सावन पुत्रदा एकादशी 2026 तारीख

सावन का प्रारंभ आज 30 जुलाई से हुआ है. वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल 23 अगस्त को 02:00 ए एम पर सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत हो रही है. इस तिथि का समापन 24 अगस्त को प्रात: 04:18 ए एम पर होगा. उदयातिथि के आधार पर सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त दिन रविवार को रखा जाएगा, लेकिन 24 अगस्त को भी यह व्रत रहेगा.
23 अगस्त को गृहस्थ लोग सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत रखेंगे, वहीं वैष्णव लोग सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत 24 अगस्त सोमवार को रखेंगे क्योंकि 23 अगस्त को हरि वासर का समापन सुबह 10:49 ए एम पर होगा.

23 अगस्त को सावन पुत्रदा एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:26 ए एम से लेकर 05:10 ए एम तक है, वहीं दिन का अभिजीत मुहूर्त 11:58 ए एम से लेकर दोपहर 12:49 पी एम तक है. जबकि 24 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त 04:27 ए एम से 05:11 ए एम तक और अभिजीत मुहूर्त 11:57 ए एम से दोपहर 12:49 पी एम तक है.
23 अगस्त को सुबह 07:32 ए एम से लेकर दोपहर 12:24 पी एम के बीच आप विष्णु पूजा कर सकते हैं, वहीं 24 अगस्त को विष्णु पूजा सुबह 05:55 ए एम से 07:32 ए एम और सुबह 09:09 ए एम से 10:46 ए एम के बीच कर सकते हैं.
सावन पुत्रदा एकादशी 2026 पारण समय
जो लोग 23 अगस्त को सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत रहेंगे, वे पारण 24 अगस्त को दोपहर में 01:41 पी एम से शाम 04:16 पी एम के बीच कभी कर सकते हैं. वहीं 24 अगस्त को व्रत रखने वाले लोग पारण 25 अगस्त को सुबह में 05:55 ए एम से 06:20 ए एम के बीच कर सकते हैं.
सावन पुत्रदा एकादशी का महत्व
सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत और पूजन करने से संतान की प्राप्ति होती है. जिनके पास संतान है, वे उनके सुख, समृद्धि और उन्नति के लिए यह व्रत रखते हैं. वहीं इस दिन व्रत और पूजा से पाप मिटते हैं, पुण्य की प्राप्ति होती है. हरि कृपा से व्यक्ति को मोक्ष ​भी मिलता है.