उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के संग्रामपुर विकासखंड स्थित भौसिंहपुर गांव में प्राचीन मां कालिका धाम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्थान का संबंध महर्षि च्यवन और राजा शर्याति की पुत्री राजकुमारी सुकन्या से है. मंदिर के समीप स्थित अमृत कुंड को भी भक्त पवित्र मानते हैं. आइए जानते हैं इस धाम से जुड़ी मान्यताएं और इसकी पौराणिक कथा.
अमेठी के संग्रामपुर विकासखंड के भौसिंहपुर गांव में मां कालिका धाम स्थित है. यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ अपनी प्राचीन मान्यताओं के लिए भी जाना जाता है. वर्षभर यहां श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं.
मंदिर के समीप अमृत कुंड स्थित है. श्रद्धालु इसके जल को पवित्र और शीतल मानते हैं. मान्यता है कि कुंड के जल का स्पर्श करने से भक्तों के दुख और कष्ट दूर होते हैं. लोग यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं.
स्थानीय धार्मिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में इस स्थान पर घना जंगल हुआ करता था. महर्षि च्यवन यहां तपस्या में लीन थे. लंबे समय तक तपस्या के कारण उनके शरीर पर दीमक की बांबी जम गई थी और उन्हें आसपास की गतिविधियों का पता नहीं चला.
कथा के अनुसार, राजा शर्याति अपनी पुत्री सुकन्या के साथ जंगल में आए थे. राजकुमारी से अनजाने में महर्षि च्यवन की आंखों में तिनका लग गया, जिससे ऋषि नाराज हो गए. बाद में राजा ने क्षमा मांगी और सुकन्या को महर्षि की सेवा के लिए सौंप दिया. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसके बाद राजा के सैनिकों और प्रजा पर आया संकट दूर हो गया.
मंदिर के महंत के अनुसार, इसी स्थान पर महर्षि च्यवन ने मां भगवती की आराधना की थी. यहां सोम यज्ञ हुआ था, जिसमें अश्विनी कुमार भी शामिल हुए थे. मान्यता है कि मां भगवती प्रसन्न होकर अमृत कुंड के पास शिला के रूप में विराजमान हुईं.
मंदिर के पुजारी महंत श्री महाराज के अनुसार, यहां देश-विदेश से भक्त दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं. श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार टिकरी चढ़ाते हैं और मंदिर में घंटे बांधते हैं. अमृत कुंड में स्नान और जल के इस्तेमाल को लेकर भी लोगों की अपनी धार्मिक मान्यताएं हैं.

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