मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) एक बार फिर बड़े पैमाने पर नागरिक असंतोष और उग्र विरोध प्रदर्शनों की आग में झुलस रहा है। रावलाकोट सहित क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण संभागों में पिछले 11 दिनों से अघोषित कर्फ्यू जैसे कड़े प्रतिबंध लागू हैं, जबकि बीते 10 दिनों से मुकम्मल बंद और चक्का जाम के कारण पूरे इलाके की रफ्तार थम गई है। नागरिक अधिकारों के लिए लड़ रहे संगठन 'जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JKJAAC) का कहना है कि स्थानीय अवाम अपनी बुनियादी जरूरतों और हकों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हुई है, लेकिन पाकिस्तानी हुकूमत और स्थानीय प्रशासन इस शांतिपूर्ण जन-आंदोलन को बलपूर्वक कुचलने के लिए लगातार दमनकारी नीतियां अपना रहा है।
आखिर रावलाकोट में क्यों सुलग रहा है जनता का गुस्सा?
एक्शन कमेटी के स्थानीय पदाधिकारियों के मुताबिक, रावलाकोट के अलग-अलग रणनीतिक चौराहों और प्रवेश द्वारों पर प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण धरने अनवरत जारी हैं। इस आंदोलन को व्यापारिक संगठनों, युवाओं और आम नागरिकों का अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है। प्रदर्शनकारी बुनियादी सामाजिक-आर्थिक अधिकारों, बढ़ती महंगाई और करों (टैक्स) के बोझ के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा लगाए गए कड़े पहरे, मोबाइल इंटरनेट बंदी और लगातार बढ़ते दबाव के बावजूद यह जमीनी आंदोलन कमजोर होने के बजाय दिन-ब-दिन और मजबूत होता जा रहा है।
सुरक्षा बलों पर काफिलों को रोकने और गिरफ्तारियों के गंभीर आरोप
आंदोलन की अगुवाई कर रहे नेताओं ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों पर संगीन आरोप मढ़े हैं। उनका दावा है कि नीलम घाटी जैसे सुदूर इलाकों से रावलाकोट की तरफ आ रहे प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण काफिलों और गाड़ियों को सुरक्षाबलों ने जबरन रोकने की कोशिश की। हालांकि, इस तनातनी में अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। संगठन ने आरोप लगाया है कि प्रमुख कार्यकर्ताओं की अवैध गिरफ्तारियों, धमकियों और डराने-धमकाने के हथकंडों के जरिए आंदोलन को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इसके विपरीत धरना स्थलों पर महिलाओं और बुजुर्गों समेत लोगों का हुजूम लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
दवाइयों और राशन की सप्लाई रोकी, आम जनता में त्राहि-त्राहि
स्थानीय सूत्रों और प्रदर्शनकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, सोनू क्षेत्र के निकटवर्ती रास्तों पर प्रशासन ने रात के अंधेरे में भारी बैरिकेडिंग कर पूरी आवाजाही को ठप कर दिया है। कमेटी का आरोप है कि जीवन रक्षक दवाइयां, बच्चों के दूध, राशन और अन्य अत्यंत आवश्यक सामग्रियों को लेकर आ रहे ट्रकों और निजी वाहनों को भी जबरन सीमा पर ही रोक दिया गया है।
इस अड़ियल रवैये के कारण क्षेत्र में आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत हो गई है और आम नागरिकों को बेहद गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। लगातार जारी हड़ताल के चलते सभी छोटे-बड़े बाजार पूरी तरह बंद हैं, व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर ताले लटके हैं, मुख्य राजमार्ग अवरुद्ध हैं और सार्वजनिक परिवहन के साधन नदारद हैं।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा संघर्ष
एक्शन कमेटी (JKJAAC) ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का ध्यान आकर्षित करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उनका यह प्रतिरोध पूरी तरह से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक हुकूमत जनता की जायज मांगों को मान नहीं लेती, तब तक यह बंद और धरना खत्म नहीं होगा।
दूसरी ओर, इस गंभीर मानवीय संकट और पाबंदियों ने वैश्विक पटल पर पाकिस्तानी प्रशासन के दावों की पोल खोल कर रख दी है। फिलहाल, रावलाकोट और उसके आसपास के पूरे बेल्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और आने वाले दिनों में यह टकराव और गहराने के आसार नजर आ रहे हैं।

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