उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए एनएसजी (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) के कमांडो ने एक विशेष मॉक ड्रिल को अंजाम दिया है। मुंबई से आई एनएसजी की टीम ने रात बारह बजे से दो बजे के बीच यह अभ्यास किया, जिसकी शुरुआत महाकाल लोक के नंदी द्वार से हुई और यह मानसरोवर क्षेत्र तक जारी रहा। इस दौरान स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम भी पूरी मुस्तैदी के साथ मौजूद रही।
आधुनिक हथियारों से लैस कमांडोज ने संभाला मोर्चा
रात साढ़े बारह बजे के करीब काले लिबास में आधुनिक हथियारों से लैस एनएसजी के जवान पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आए। अंधेरे में होने वाले संभावित खतरों से निपटने के अभ्यास के दौरान कमांडोज ने तालमेल की बेहतरीन मिसाल पेश की। एक जवान खंभे की आड़ लेकर आगे बढ़ रहा था, तो दूसरा साथी उसे पूरी कवर दे रहा था। अचानक बत्ती गुल होने और अंधेरा छा जाने के बावजूद जवानों की रफ्तार और उनके मूवमेंट पर कोई फर्क नहीं पड़ा। वे महाकाल लोक के खंभों को ढाल बनाते हुए तेजी से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते रहे।
संदिग्ध को ढूंढकर घायलों को पहुंचाया अस्पताल
इस पूर्वाभ्यास के दौरान कमांडोज ने अंधेरे के बीच छिपे एक संदिग्ध को कुशलतापूर्वक तलाश लिया। वहीं, अफरातफरी की इस स्थिति में अभ्यास के तहत कुछ श्रद्धालुओं (डमी) को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और घायल हुए श्रद्धालुओं को तुरंत अस्पताल भेजने की प्रक्रिया का भी रिहर्सल किया गया। उज्जैन के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक शर्मा ने जानकारी दी कि महाकाल मंदिर देश के प्रमुख और अति-संवेदनशील धार्मिक स्थलों में शामिल है, इसलिए किसी भी आपात स्थिति से निपटने के वास्ते सौ से अधिक एनएसजी कमांडो, स्थानीय पुलिस और मंदिर प्रशासन ने मिलकर इस उन्नत मॉक ड्रिल को पूरा किया है।

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