वॉशिंगटन: अटलांटिक महासागर में हफ्तों तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे और अमेरिकी तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) के साथ हुई लुकाछिपी के बाद आखिरकार एक प्रतिबंधित तेल टैंकर के कप्तान ने अमेरिकी संघीय अदालत में अपना गुनाह कबूल कर लिया है। अमेरिका का आरोप है कि यह विशाल समुद्री जहाज अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को ताक पर रखकर ईरानी कच्चे तेल की तस्करी कर रहा था और अमेरिकी सुरक्षा बलों द्वारा दिए गए रुकने के आदेशों की लगातार अवहेलना कर रहा था। इस कार्रवाई को व्हाइट हाउस की उस बड़ी रणनीतिक योजना का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के अवैध वैश्विक तेल व्यापार और उसके 'शैडो फ्लीट' (गुप्त जहाजी बेड़े) पर पूरी तरह लगाम कसना है।
अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जॉर्जियाई मूल के नागरिक और 'बेला-1' नामक तेल टैंकर के पूर्व कप्तान अवतांदिल कालांदाद्जे ने अदालत के सामने आत्मसमर्पण करते हुए दोष स्वीकार कर लिया है। उन पर अमेरिकी कानून के तहत तटरक्षक बल के वैध आदेशों को न मानने और भागने का आरोप था। सरकारी वकीलों ने बताया कि दिसंबर 2025 में जब अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इस संदिग्ध टैंकर को रोकने का प्रयास किया, तो कप्तान ने जहाज की रफ्तार बढ़ाकर भागने की कोशिश की। इसके बाद अटलांटिक महासागर के गहरे पानी में कई हफ्तों तक पीछा करने का सिलसिला चला और आखिरकार 7 जनवरी को अमेरिकी बलों ने इस जहाज को अपने कब्जे में ले लिया।
पहचान छिपाकर 18 लाख बैरल तेल की तस्करी का आरोप
अमेरिकी जांच एजेंसियों का दावा है कि 'बेला-1' टैंकर ने सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच प्रतिबंधों को धता बताते हुए करीब 18 लाख बैरल ईरानी मूल के कच्चे तेल को एशियाई देशों के बाजारों तक पहुँचाया। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि इस अवैध कारोबार को छुपाने के लिए कप्तान और चालक दल ने कई शातिराना हथकंडे अपनाए थे। जांच में सामने आया कि:
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जहाज के ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) यानी ट्रैकिंग रडार को जानबूझकर बंद रखा गया था ताकि उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके।
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अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमाओं में दूसरे जहाजों में तेल ट्रांसफर (जहाज से जहाज में लोडिंग) करते समय टैंकर की असली पहचान को छुपाया गया था।
अटलांटिक महासागर में कैसे हुआ पीछा?
तटरक्षक बल की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 में यह टैंकर वेनेजुएला के समुद्री क्षेत्र की ओर बढ़ रहा था। इसी दौरान अमेरिकी कोस्ट गार्ड के आधुनिक पोत 'मुनरो' ने उसे घेरकर रुकने की चेतावनी दी। बार-बार मिले सिग्नलों और रेडियो चेतावनियों के बावजूद कप्तान कालांदाद्जे ने जहाज को रोकने से साफ इनकार कर दिया और खतरनाक तरीके से जहाज को भगाता रहा। इस हठधर्मिता के कारण बीच समंदर में बेहद जोखिमभरी स्थिति पैदा हो गई, जिसके बाद अमेरिकी नौसैनिकों को बेहद कठिन और प्रतिकूल परिस्थितियों में रणनीतिक ऑपरेशन चलाकर जहाज को जब्त करना पड़ा।
सबूत मिटाने की कोशिश और संभावित सजा
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, कप्तान ने यह सब जहाज का संचालन करने वाली कंपनी के आला अधिकारियों के गुप्त निर्देशों पर किया था। गिरफ्तारी से ठीक पहले कप्तान ने जहाज पर मौजूद कई महत्वपूर्ण लॉग बुक, रूट मैप और डिजिटल रिकॉर्ड को भी नष्ट कर दिया ताकि अमेरिकी एजेंसियों को सबूत न मिल सकें। इस लापरवाही से अमेरिकी कमांडो और नौसैनिकों की जान भी जोखिम में पड़ गई थी।
फैसले की तारीख तय: अमेरिकी अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में अंतिम सजा सुनाने के लिए 7 अगस्त की तारीख मुकर्रर की है। इस अपराध के लिए कप्तान को अधिकतम 5 साल की कैद हो सकती है। अमेरिकी न्याय विभाग ने साफ किया है कि जेल की अवधि पूरी होने के तुरंत बाद दोषी कप्तान को अमेरिका से डिपोर्ट (निर्वासित) कर दिया जाएगा। सरकार ने कड़ा संदेश दिया है कि प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले किसी भी विदेशी जहाज को बख्शा नहीं जाएगा।

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