अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा और चंदा चोरी का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष की तरफ से लगातार बेहद गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी बीच, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट पेश कर दी है, जिसमें साफ कहा गया है कि इस पूरे मामले में कुछ भी 'क्लीन' नहीं है। एसआईटी ने अब अपनी जांच का दायरा काफी बड़ा कर दिया है। जांच टीम अब उन सभी लोगों से सबूत, रिकॉर्ड और दस्तावेज इकट्ठा करने में जुट गई है, जिन्होंने चंदा चोरी को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे।
आप सांसद संजय सिंह को एसआईटी का समन
राम मंदिर चंदा चोरी मामले में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि राम मंदिर के नाम पर कई सौ करोड़ रुपये की चंदा चोरी की गई है। इसी सिलसिले में एसआईटी ने उन्हें पूछताछ और सबूत पेश करने के लिए बुलाया है। संजय सिंह आज गुरुवार को सुबह 11 बजे जांच टीम के सामने पेश होंगे।
संजय सिंह के पास घोटाले के पुख्ता सबूत
सांसद संजय सिंह का दावा है कि उनके पास दान चोरी और अयोध्या में जमीन की खरीद-फरोख्त में हुए बड़े घोटाले से जुड़े कई पुख्ता सबूत मौजूद हैं। पिछले दिनों उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि अगर जांच एजेंसियां उनसे ये सबूत मांगेंगी, तो वह इन्हें सौंपने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसी को देखते हुए एसआईटी ने फैसला किया कि जो भी व्यक्ति इस मामले से जुड़े साक्ष्य देना चाहता है, वह जांच टीम के सामने आकर दे सकता है।
चंपत राय ने साधी चुप्पी, रिकॉर्ड देने से किया इनकार
चंदा चोरी के गंभीर आरोपों से घिरे राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध ली है। उन्होंने एसआईटी जांच का हवाला देते हुए ट्रस्ट की आमदनी, खर्च, दान और बैंक खातों का कोई भी रिकॉर्ड देने से साफ इनकार कर दिया है। ट्रस्ट के इस रवैये से मामले में सस्पेंस और ज्यादा बढ़ गया है।
चंपत राय समेत 17 लोगों पर केस दर्ज करने की सिफारिश
एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में ट्रस्ट के सचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव समेत कुल 17 लोगों को आरोपी माना है। एसआईटी ने इन सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की सिफारिश भी की है। वहीं दूसरी तरफ, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी राम मंदिर चंदा चोरी केस में जल्द से जल्द एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

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