September 18, 2026

रोड शो में मेयर को रथ से उतारने पर बवाल, नितिन नवीन के कार्यक्रम में महापौर ने जताई नाराजगी

उज्जैन। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के रोड-शो के दौरान उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल को रथ से उतारे जाने का मामला लगातार गर्माता जा रहा है। इस घटनाक्रम से आहत होकर महापौर टटवाल ने सार्वजनिक रूप से विरोध दर्ज कराने की घोषणा कर दी है। उन्होंने 20 सितंबर को प्रातः 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक फ्रीगंज स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष मौन बैठकर विरोध प्रदर्शन करने का अल्टीमेटम जारी किया है। टटवाल ने कहा कि वे बाबा साहेब की प्रतिमा के समक्ष बैठकर इस अपमान को सहन करने और जनता की सेवा निष्ठापूर्वक करते रहने की शक्ति मांगेंगे।

बेरवा समाज की बैठक में निंदा प्रस्ताव पारित

महापौर के साथ घटित इस घटनाक्रम को लेकर संत बालीनाथ मंदिर बागपुरा में बेरवा समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में महापौर के साथ हुए दुर्व्यवहार की कड़े शब्दों में भर्त्सना की गई और समाज ने 20 सितंबर को होने वाले मौन प्रदर्शन को पूर्ण समर्थन देने का निर्णय लिया। महापौर टटवाल ने स्पष्ट किया कि शहर के प्रथम नागरिक होने के नाते वे हेलीपैड पर अगवानी के लिए गए थे और जिला प्रभारी बजरंग पुरोहित तथा कार्यक्रम प्रभारी जयपाल सिंह चावड़ा के कहने पर ही विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा के साथ रथ पर सवार हुए थे, लेकिन बाद में उन्हें अचानक नीचे उतरने को कह दिया गया।

प्रोटोकॉल सूची और रथ पर मौजूदगी पर उठे सवाल

इस प्रकरण के बाद प्रोटोकॉल सूची को लेकर भी बहस छिड़ गई है। जानकारी के अनुसार, हेलीपैड से रवाना हुए रथ के लिए तय सूची में महापौर का नाम सम्मिलित नहीं था, जबकि शिप्रा तट स्थित मुख्य मंच की सूची में उनका नाम दर्ज था। इस पर टटवाल ने कहा कि वे सूची की तकनीकी बारीकियों से अनभिज्ञ हैं, उन्हें केवल रथ से उतारा गया था। गौरतलब है कि रोड-शो के दौरान रथ पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा और नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल मौजूद थे।

कांग्रेस ने साधा निशाना, मांगी माफी की मांग

इस राजनीतिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए तराना से कांग्रेस विधायक महेश परमार ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे भाजपा का दलित विरोधी चरित्र करार देते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति या समाज का नहीं, बल्कि पूरे शहर के प्रथम नागरिक का अपमान है। परमार ने कहा कि घटना के समय मौके पर मौजूद अन्य जनप्रतिनिधियों को इस पर आपत्ति जतानी चाहिए थी। उन्होंने मांग की है कि इस घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार लोगों को महापौर से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।