नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन भी दोनों सदनों में जोरदार हंगामा देखने को मिला, जिसके चलते विधायी कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित हुई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े विपक्षी सांसदों के उग्र रुख को देखते हुए लोकसभा की बैठक को अगले दिन तक के लिए टाल दिया गया, जबकि राज्यसभा की कार्यवाही को अपराह्न तीन बजे तक स्थगित करना पड़ा।
विपक्ष का हमला और खरगे का सवाल
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए सवाल उठाया कि यदि सरकार बहस कराने के पक्ष में थी, तो उसने विपक्ष की शुरुआती मांग पर तुरंत ध्यान क्यों नहीं दिया? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की देरी के कारण ही स्थिति बिगड़ी और बाद में छात्रों को लाठीचार्ज का सामना करना पड़ा। खरगे ने आगे कहा कि सत्तापक्ष के सदस्यों द्वारा संसद के मुख्य द्वार को बाधित करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के लिए प्रधानमंत्री की खामोशी को जिम्मेदार ठहराते हुए शिक्षा मंत्री के पद छोड़ने तक अपना विरोध जारी रखने का ऐलान किया।
सत्तापक्ष की पलटवार और भाजपा की सफाई
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है और इसी प्रतिबद्धता के तहत प्रधानमंत्री ने फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर संसद का समय बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष वास्तव में किसी सार्थक चर्चा में रुचि नहीं रखता, बल्कि केवल बिना पूर्व सूचना के प्रदर्शन करके गैर-जिम्मेदाराना राजनीति में लिप्त है।

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