महाकाल मंदिर में हंगामा, युवक की पिटाई के मामले में जांच शुरू

उज्जैन। तीर्थ नगरी उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर मंदिर से एक बेहद संवेदनशील और विवादित मामला सामने आया है। यहां एक अन्य समुदाय का युवक एक हिंदू युवती के साथ भस्म आरती के दर्शन करने पहुंचा था। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद कुछ दक्षिणपंथी संगठन के कार्यकर्ताओं ने युवक की पहचान उजागर होने पर उसके साथ कथित तौर पर हाथापाई और मारपीट कर दी। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिससे प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में हड़कंप मच गया है। जानकारी के मुताबिक, यह घटना मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात की है, जब महाराष्ट्र के पुणे (पिंपरी) का निवासी सरफराज शेख (26) एक युवती के साथ महाकाल मंदिर की अलसुबह होने वाली भस्म आरती में शामिल होने के लिए कतार में लगा था। प्रवेश द्वार पर पहचान पत्र (ID) की तकनीकी जांच के दौरान उसकी वास्तविक धार्मिक पहचान सामने आ गई, जिसके बाद वहां हंगामा खड़ा हो गया।

पहचान छिपाने की कोशिश और मंदिर परिसर में हंगामा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक ने मंदिर की परंपराओं के अनुरूप दिखने और अपनी पहचान छुपाने के उद्देश्य से अपने माथे पर 'महाकाल' का तिलक भी लगवा रखा था। हालांकि, प्रवेश द्वार पर सुरक्षा जांच और दस्तावेजों के मिलान के दौरान जैसे ही यह साफ हुआ कि युवक गैर-हिंदू है और उसके साथ आई युवती दूसरे समुदाय से है, वहां मौजूद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को इसकी भनक लग गई। कार्यकर्ताओं ने तुरंत युवक को घेर लिया और उसके साथ वाद-विवाद करते हुए मारपीट शुरू कर दी। इस अप्रत्याशित घटना के चलते काफी समय तक मंदिर प्रांगण में अफरा-तफरी और तनाव की स्थिति बनी रही। घटना की जानकारी मिलते ही तैनात पुलिस बल ने तुरंत दखल दिया और स्थिति को नियंत्रण में लिया।

थाने पहुंचे दोनों पक्षों के परिजन और पुलिस की मुस्तैदी

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर महाकाल थाना प्रभारी गगन यादव ने आधिकारिक बयान में बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया टीम (क्यूआरटी) ने मंदिर परिसर के भीतर प्रवेश किया और युवक को भीड़ के बीच से सुरक्षित निकालकर थाने ले आई। पुलिस प्रशासन ने एहतियात के तौर पर युवक और युवती दोनों के ही परिवार वालों को सूचित कर थाने तलब किया है। थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से इस मामले में कोई औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

वायरल वीडियो और धर्मांतरण के कोण से जांच

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भले ही अभी तक कोई लिखित तहरीर नहीं मिली है, लेकिन कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो के आधार पर संदिग्धों की पहचान की जा रही है। अगर कोई भी पक्ष शिकायत लेकर आगे आता है, तो नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस बात की भी गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि इस पूरे मामले के पीछे कहीं धर्मांतरण या किसी अन्य प्रकार का कोई संदिग्ध कोण तो शामिल नहीं है। दोनों से पूछताछ के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।