November 1, 2026

दिवाली पर जमकर हुआ UPI से भुगतान, अक्टूबर में लेनदेन की रकम ₹31.53 लाख करोड़ पहुंची

नई दिल्ली। देश के डिजिटल भुगतान ढांचे में एक बार फिर अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है, विशेषकर त्योहारी सीजन के दौरान यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से होने वाले लेन-देन में जबरदस्त उछाल देखा गया है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा रविवार को जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर माह के दौरान यूपीआई लेन-देन की कुल संख्या पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 23 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी के साथ 25.47 अरब के आंकड़े को पार कर गई है। इसके साथ ही, इस समयावधि में डिजिटल माध्यमों से हुए कुल लेन-देन का वित्तीय मूल्य भी 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 31.53 लाख करोड़ रुपये के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है।

दैनिक लेन-देन के नए रिकॉर्ड और आईएमपीएस की स्थिति

राष्ट्रीय भुगतान निगम के आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि अक्टूबर के महीने में यूपीआई के जरिए प्रतिदिन औसतन लगभग 82.2 करोड़ लेन-देन संपादित किए गए। इस दौरान रोजाना होने वाले लेन-देन की औसत कुल राशि लगभग 1,01,707 करोड़ रुपये दर्ज की गई। यदि इसकी तुलना ठीक पिछले महीने यानी सितंबर से की जाए, तो उस दौरान यूपीआई लेन-देन की संख्या 24.07 अरब रही थी और कुल वित्तीय लेनदेन 29.37 लाख करोड़ रुपये था। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक रूप से तत्काल फंड ट्रांसफर की सुविधा प्रदान करने वाली आईएमपीएस (तत्काल भुगतान सेवा) के माध्यम से होने वाले कुल लेन-देन में भी सालाना आधार पर 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे यह बढ़कर 7.63 लाख करोड़ रुपये हो गया। अक्टूबर माह में आईएमपीएस के जरिए रोजाना औसतन 1.21 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए और प्रतिदिन औसत लेन-देन का मूल्य 24,601 करोड़ रुपये रहा।

त्योहारी सीजन को देखते हुए एमडीआर लागू करने का निर्णय स्थगित

व्यापारिक वर्ग और उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए एनपीसीआई ने पिछले माह चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने के अपने फैसले को दीपावली के बाद तक के लिए टाल दिया था। त्योहारी सीजन के दौरान व्यापार को सुगम बनाने के उद्देश्य से यूपीआई और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने यह स्थगन निर्णय लिया था। मूल योजना के अनुसार यह नया एमडीआर नियम 15 अक्टूबर से प्रभावी होना था, परंतु अब इसकी नई लागू होने की तिथि की घोषणा अलग से की जाएगी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रेलवे बुकिंग, दूरसंचार सेवाओं, बीमा प्रीमियम भुगतान और ईंधन क्रय जैसी विशिष्ट मर्चेंट श्रेणियों में 2,000 रुपये से अधिक के डिजिटल भुगतान पर 5 रुपये का निश्चित शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि बड़े व्यापारियों को इसी सीमा से अधिक का भुगतान करने पर 0.4 प्रतिशत का शुल्क देना होगा, जो प्रति ट्रांजेक्शन अधिकतम 300 रुपये तक ही सीमित रहेगा।

व्यापक नेटवर्क पर एमडीआर का सीमित प्रभाव

भुगतान निगम का यह स्पष्ट करना है कि प्रस्तावित एमडीआर व्यवस्था का देश के संपूर्ण यूपीआई नेटवर्क पर बहुत ही सीमित प्रभाव पड़ेगा। विभिन्न अनुमानों के अनुसार, कुल मर्चेंट लेन-देन का मात्र 4 प्रतिशत हिस्सा ही इस नई व्यवस्था के दायरे के अंतर्गत आएगा। इसका अभिप्राय यह है कि देश में व्यापारियों को किए जाने वाले कुल यूपीआई भुगतानों में से 95 प्रतिशत से अधिक भुगतान पूरी तरह से शुल्क मुक्त बने रहेंगे, जिससे छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।