रिटायर हुए उपेंद्र द्विवेदी, ले. जनरल धीरज सेठ ने संभाला पदभार

नई दिल्ली: भारतीय सेना में चार दशकों से भी अधिक समय तक देश की गौरवशाली सेवा करने के बाद जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने थल सेना प्रमुख का पद छोड़ दिया है। उनके स्थान पर अब लेफ्टीनेंट जनरल धीरज सेठ ने भारतीय थल सेना के नए प्रमुख के रूप में अपनी कमान संभाल ली है। अपनी विदाई के इस ऐतिहासिक क्षण पर जनरल द्विवेदी काफी भावुक नजर आए। उन्होंने अपने विदाई संबोधन में कहा कि भारतीय सेना का हिस्सा होना और इसकी सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य रहा है। इस दौरान उन्होंने सभी सैनिकों, पूर्व सैन्यकर्मियों, उनके परिवारों और समस्त देशवासियों का सहृदय आभार व्यक्त किया। कार्यभार सौंपने से पहले उन्होंने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) जाकर देश के वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

सैन्य सफर और कार्यकाल की उपलब्धियां

विदाई समारोह के दौरान जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सैनिक स्कूल से शुरू हुए अपने इस अविस्मरणीय सफर को याद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना की असली ताकत किसी एक व्यक्ति में नहीं, बल्कि उसके जांबाज सैनिकों, कुशल कमांडरों, पूर्व सैनिकों और देशवासियों के अटूट विश्वास में निहित है। अपने कार्यकाल की समीक्षा करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में सेना ने हर मोर्चे पर उच्च स्तर की तैयारी और सतर्कता बनाए रखी। उत्तरी सीमाओं पर 'ऑपरेशन स्नो लेपर्ड' के तहत सेना ने पूरी मजबूती दिखाई, तो वहीं पश्चिमी सीमा पर भी संयम और दृढ़ता का परिचय दिया। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' को भारतीय सेना की क्षमता और प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

राष्ट्रीय सुरक्षा का 'न्यू नॉर्मल'

राष्ट्रीय सुरक्षा के बदलते आयामों पर चर्चा करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच का आपसी तालमेल अब पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुका है। उन्होंने भविष्य की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि आने वाले समय के युद्ध संयुक्त, एकीकृत और थिएटर आधारित होंगे। अब तीनों सेनाओं को एक साथ मिलकर रणनीतियां बनानी होंगी, निर्णय लेने होंगे और कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने इसे भारत की सुरक्षा रणनीति का 'न्यू नॉर्मल' (नया सामान्य) करार दिया। उनके नेतृत्व में सेना ने वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों के अनुरूप अपनी रणनीतियों को बेहद मजबूत किया है।

नए सेना प्रमुख पर जताया पूरा भरोसा

पदमुक्त होते समय जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने उत्तराधिकारी लेफ्टीनेंट जनरल धीरज सेठ की क्षमताओं पर पूरा विश्वास प्रकट किया। उन्होंने जनरल सेठ को एक अत्यंत अनुभवी सैनिक और सक्षम विजनरी नेता बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए नेतृत्व में भारतीय सेना अपनी पेशेवर उत्कृष्टता, गौरवशाली परंपराओं और परिचालन क्षमता को बनाए रखते हुए कामयाबी की नई ऊंचाइयों को छुएगी। उन्होंने कहा कि सेना का भविष्य सुरक्षित हाथों में है और उन्हें इसके आगे बढ़ने का पूरा भरोसा है।

जानिए नए सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को

  • प्रतिष्ठित पृष्ठभूमि: लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं और देश सेवा का लंबा जज्बा रखते हैं।

  • लंबा अनुभव: उन्होंने दिसंबर 1986 में भारतीय सेना की 'आर्मर्ड कोर' में कमीशन प्राप्त किया था और उन्हें सैन्य अभियानों व रणनीतिक योजना का चार दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव है।

  • महत्वपूर्ण कमान: वह दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) रह चुके हैं और पश्चिमी मोर्चे पर एक आर्मर्ड ब्रिगेड की कमान सफलतापूर्वक संभाल चुके हैं।

  • रणनीतिक नेतृत्व: उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों का डटकर नेतृत्व किया और प्रतिष्ठित सुदर्शन चक्र कोर के कमांडर भी रहे।

  • शीर्ष पदों पर कार्य: आर्मी कमांडर के तौर पर वह साउथ वेस्टर्न कमांड और सदर्न कमांड जैसी दो महत्वपूर्ण ऑपरेशनल आर्मी कमांड का नेतृत्व कर चुके हैं।

  • आधुनिकीकरण में भूमिका: ढाई वर्ष से अधिक समय तक अहम सैन्य थिएटरों में रणनीतिक भूमिका निभाने के साथ-साथ वह भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और संयुक्त सैन्य संचालन से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।