नागपुर। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर के काटोल क्षेत्र में 'एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग' के एक कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि अब वे पहले की भांति अधिक कार्य करने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब नई पीढ़ी को जिम्मेदारियां संभालनी चाहिए। आदिवासी विद्यार्थियों के बीच दिए गए उनके इस वक्तव्य के बाद महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में इसके निहितार्थ निकाले जाने लगे हैं।
अनुभव साझा किए और बेहतर स्वास्थ्य का दिया संदेश
अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने अपने युवा दिनों के स्मरण साझा करते हुए कहा कि शुरुआती दौर में उनकी दिनचर्या काफी अनियमित हुआ करती थी। कोविड-19 महामारी के पश्चात उन्होंने अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देना आरंभ किया। उन्होंने युवाओं को प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा व्यायाम और प्राणायाम करने की सलाह दी। गडकरी ने मुस्कुराते हुए पुरानी यादों का उल्लेख किया कि राजनीतिक जीवन के शुरुआती समय में वे लूना और विजय स्कूटर से संगठनात्मक कार्यों के लिए यात्राएं किया करते थे।
उत्कृष्ट स्वास्थ्य के बिना सत्ता और संपत्ति अर्थहीन
स्वास्थ्य के महत्व को सर्वोपरि बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि शरीर निरोगी है, तभी सत्ता, धन-संपत्ति, ज्ञान और सुंदरता का वास्तविक आनंद है। जीवन की नश्वरता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति जीवन भर जो भी अर्जित करता है, अंततः सब यहीं रह जाता है। अतः प्रत्येक व्यक्ति को अपने शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिक दायित्व मानना चाहिए।
सुदूर क्षेत्रों तक शिक्षा पहुंचाने का संकल्प
गडकरी ने 'एकलव्य एकल विद्यालय' द्वारा सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के अंतिम छोर पर स्थित आदिवासी इलाकों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की रोशनी पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वयं को सामर्थ्यवान बनाएं और समाज के वंचित एवं निर्धन वर्गों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में अपना योगदान दें।

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