जयपुर । जैव विविधता से समृद्ध वागड़-मेवाड़ अंचल में दुर्लभ वन्य जीव वनस्पतियों की खोज का क्रम लगातार जारी है इसी श्रृंखला में उदयपुर अंचल में दुर्लभ प्रजाति की दो डेमसैलफ्लाई देखी गयी हैं। उदयपुर के सेवानिवृत्त वन विशेषज्ञ डॉ. सतीश कुमार शर्मा तथा फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के दो जीव विज्ञानी डॉ. अनिल सरसावन तथा मनोहर पवार ने उदयपुर जिले के कुंडेश्वर महादेव क्षेत्र में कुंडाल का गुड़ा गांव के पास एक जलधारा की वनस्पति पर बैठी स्प्लेंडिड हार्टलेट नामक डेमसैलफ्लाई की खोज की है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि वैज्ञानिक भाषा में इसे एग्रीक्नेमिस स्प्लेंडिडीसीमा कहा जाता है यह एक पतली, आंखों पर दो रंग की आभा वाली डेमसैलफ्लाई है, जिसमें नर व मादा को स्पष्ट रूप से विभेदित किया जा सकता है। नर के शरीर में काले रंग से कहीं-कहीं नीला आभा नजर आती है जबकि मादा में भूरापन लिए शरीर की आभा होती है। भारत में इस कीट की असम, त्रिपुरा, बंगाल, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल व गुजरात से उपस्थित ज्ञात है। राजस्थान भी अब इस सूची में शामिल हो गया है।

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