रायपुर : खरीफ सीजन में समय पर बीज और उर्वरकों की उपलब्धता किसी भी किसान के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता होती है। जब यही सुविधा सही समय पर मिल जाए, तो किसान पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी खेती की शुरुआत करता है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम लालपुर निवासी बलराम के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, चौनपुर शाखा, मनेन्द्रगढ़ से समय पर कृषि आदान मिलने से उनकी खेती की तैयारी बिना किसी बाधा के पूरी हो सकी।
समय पर मिला कृषि आदान, बढ़ा किसान का आत्मविश्वास
समिति के माध्यम से किसान बलराम को 30 किलोग्राम एमटीयू-1156 धान का प्रमाणित बीज, 6 बोरी, नीम लेपित यूरिया, 2 बोतल इफको नैनो डीएपी, 4 बोरी डीएपी तथा 1 बोरी पोटाश उपलब्ध कराया गया। सभी आवश्यक कृषि सामग्री एक ही स्थान पर और समय पर मिलने से उन्होंने खरीफ फसल की बुवाई की तैयारी निर्धारित समय में पूरी कर ली।
अब नहीं होती बीज और खाद की चिंता
किसान बलराम बताते हैं कि पहले खेती के मौसम में बीज और उर्वरकों की व्यवस्था करना काफी कठिन होता था। कई बार अलग-अलग स्थानों पर भटकना पड़ता था, जिससे समय और श्रम दोनों की हानि होती थी। लेकिन अब सहकारी समिति के माध्यम से सभी आवश्यक कृषि सामग्री आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इससे खेती समय पर शुरू होती है और बेहतर उत्पादन की उम्मीद भी बढ़ जाती है।
सरकारी व्यवस्था ने आसान बनाई खेती की राह
बलराम ने राज्य सरकार एवं आदिम जाति सेवा सहकारी समिति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था वास्तव में किसान हित में एक प्रभावी पहल है। इससे छोटे और सीमांत किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है तथा वे बिना किसी परेशानी के पूरे उत्साह के साथ खेती कर पा रहे हैं।
प्रेरणा बन रही है किसान बलराम की सफलता
किसान बलराम की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि किसानों को समय पर आवश्यक कृषि आदान उपलब्ध हो जाए, तो वे बेहतर योजना के साथ खेती कर सकते हैं। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों तक पहुंच रही यह सुविधा न केवल खेती को सरल और व्यवस्थित बना रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यही प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का आधार बन रहा है।

More Stories
स्व-सहायता समूह से जुड़कर सुशीला सिंह बनीं आत्मनिर्भर
किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की सलाह, 30 जुलाई तक पूरी करें धान की रोपाई
जैव विविधता पार्क कांकेर के माकड़ी में औषधिय पौधों का रोपण- पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने की नई पहल