इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के बाशिंदे इन दिनों भीषण गर्मी में पानी की किल्लत के साथ-साथ गंभीर बिजली संकट से भी दो-चार हो रहे हैं। अभी मानसून ने दस्तक भी नहीं दी है और शहर के अधिकांश हिस्सों में अघोषित बिजली कटौती का सिलसिला शुरू हो चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन वीआईपी और रिहायशी इलाकों में पहले कभी कभार ही बिजली गुल होती थी, वहां भी पिछले दो-तीन दिनों से पूरी रात ब्लैकआउट जैसे हालात बन रहे हैं। सड़कों पर लगी स्ट्रीट लाइट से लेकर घरों की बत्तियां तक घंटों गुल रह रही हैं।
वीआईपी इलाकों का भी बुरा हाल, फॉल्ट के नाम पर खानापूर्ति
शहर का नंदानगर क्षेत्र, जहां प्रदेश के एक कद्दावर मंत्री और विधायक का निवास स्थान है, वहां भी पिछले दो दिनों से लगातार दो से तीन घंटे तक बिजली काटी जा रही है। इस पर विद्युत विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि भीषण गर्मी के चलते बिजली की मांग (लोड) अत्यधिक बढ़ गई है, जिससे ट्रांसफार्मर और लाइनों में तकनीकी खराबी आ रही है। रविवार की रात भी इस इलाके में तीन से चार बार ट्रिपिंग हुई, जिसके कारण उमस और गर्मी के बीच लोगों को बिना पंखे-कूलर के जागकर रात बितानी पड़ी। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि क्षेत्र के बिजली उपकरण और लाइनें बेहद पुरानी हो चुकी हैं, लेकिन विभाग इन्हें बदलने के बजाय सिर्फ कामचलाऊ मरम्मत कर औपचारिकता पूरी कर लेता है।
मानसून पूर्व मेंटेनेंस गायब, पेड़ की टहनियां बढ़ाएंगी मुसीबत
आमतौर पर मानसून के आगमन से पहले बिजली कंपनी लाइनों के रख-रखाव (मेंटेनेंस) का विशेष अभियान चलाती है, जिसके तहत तारों के पास पहुंच चुकी पेड़ों की डालियों की छंटाई की जाती है। हालांकि, इस बार शहर के ज्यादातर इलाकों में अब तक ऐसा कोई काम धरातल पर नहीं दिखा है। लोगों को डर है कि पहली बारिश आते ही ये टहनियां तारों पर गिरेंगी और संकट और ज्यादा गहरा जाएगा। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि करीब पांच साल पहले तक इंदौर में बिजली की ऐसी बदतर स्थिति कभी नहीं देखी गई थी, जो अब रोज की कहानी बन चुकी है।
कॉल सेंटर भी हुआ ठप, उपभोक्ताओं में भारी असंतोष
बिजली गुल होने की स्थिति में शिकायत दर्ज कराने के लिए विद्युत वितरण कंपनी द्वारा जो आधिकारिक कॉल सेंटर नंबर जारी किया गया है, वह भी संकट के समय पूरी तरह अनुत्तरदायी साबित हो रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि टोल-फ्री नंबर पर फोन लगाने पर या तो लाइन व्यस्त आती है या फिर फोन कनेक्ट ही नहीं होता। विभागीय अधिकारियों की इस घोर लापरवाही और संवादहीनता के चलते इंदौर की जनता में बिजली प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश पनप रहा है।

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