पानी की किल्लत से जूझता गांव, महिलाओं की परेशानी ने झकझोरा सिस्टम

सरगुजा। छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने वाले मैनपाट क्षेत्र से बुनियादी सुविधाओं के अभाव की एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। सरगुजा जिले के मैनपाट अंतर्गत कुनिया ग्राम पंचायत के आश्रित मोहल्ले 'जंगल पारा' में रहने वाले विशेष जनजाति परिवारों को आज के दौर में भी पीने के लिए स्वच्छ पानी नसीब नहीं हो रहा है। यहाँ के बाशिंदे अपनी प्यास बुझाने के लिए स्थानीय नाले के किनारे एक छोटा सा 'झरिया' (थुआ या अस्थाई जल स्रोत) बनाकर बेहद दूषित और मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं।

20 फीट गहरी खाई में उतरकर अंधेरे में पानी लाती हैं महिलाएं

प्यास बुझाने का यह संघर्ष ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं के लिए जान जोखिम में डालने जैसा है। साफ पानी की तलाश में महिलाओं को रोजाना अपने घरों से दूर खेतों के रास्ते होते हुए नाले तक का लंबा सफर तय करना पड़ता है। इस दौरान उन्हें करीब 20 फीट गहरी और खतरनाक खाई में नीचे उतरना पड़ता है।

जंगल पारा की अधिकांश महिलाएं दिनभर मजदूरी का काम करती हैं, जिसके कारण उन्हें लौटते-लौटते शाम हो जाती है। ऐसे में घने अंधेरे के बीच कूपियों और टॉर्च की रोशनी के सहारे ये महिलाएं खाई से पानी भरकर लाती हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मानसून (बरसात) के दिनों में उनकी यह मुसीबत दोगुनी हो जाती है, क्योंकि नाले का जलस्तर बढ़ने से उनका बनाया हुआ अस्थाई जल स्रोत पूरी तरह बाढ़ के पानी में डूब जाता है।

दूषित जल से बच्चे पड़ रहे बीमार, त्वचा रोगों ने पैर पसारे

पेयजल का यह संकट केवल कुनिया तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मैनपाट के कई अन्य अंदरूनी इलाके भी पानी की गंभीर किल्लत से जूझ रहे हैं। शुद्ध पानी की अनुपलब्धता के कारण ग्रामीण और छोटे-छोटे बच्चे इसी प्रदूषित पानी को पीने को विवश हैं, जिससे वे लगातार पेट जनित गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।

हालात इतने बदतर हैं कि लोगों के पास निस्तारी और नहाने के लिए भी पानी नहीं है। पानी के घोर संकट के कारण यहाँ के जनजातीय परिवार नियमित रूप से स्नान भी नहीं कर पा रहे हैं, जिसके चलते वयस्कों और बच्चों में कई प्रकार के चर्म रोग (स्किन इन्फेक्शन) तेजी से फैल रहे हैं।

विधायक की मुहिम से जगी आस; एक बोरवेल बदल सकता है तकदीर

इस विकट स्थिति के बीच राहत की बात यह है कि क्षेत्रीय विधायक रामकुमार टोप्पो द्वारा लगातार विभिन्न ग्रामीण अंचलों का दौरा कर पेयजल संकट से मुक्ति दिलाने के लिए युद्ध स्तर पर बोरवेल खनन कार्य कराया जा रहा है, जिससे कई गांवों को बड़ी राहत मिली है।

कुनिया जंगल पारा के पीड़ित परिवारों को भी अब स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि से बड़ी उम्मीदें हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनके इस छोटे से मोहल्ले में भी एक सरकारी बोरवेल मंजूर कर खनन करा दिया जाए, तो आसपास रहने वाले 10 से 15 परिवारों को सीधे तौर पर शुद्ध पेयजल मिलने लगेगा। इससे न सिर्फ महिलाओं को इस जानलेवा खाई में उतरने से मुक्ति मिलेगी, बल्कि पूरा गांव बीमारियों के साये से बाहर आ सकेगा।