सरोवर नगरी नैनीताल में स्थित उत्तराखंड की अधिष्ठात्री मां नयना देवी का मंदिर इन दिनों नए और भव्य स्वरूप में श्रद्धालुओं का स्वागत कर रहा है. मंदिर परिसर में निर्मित आकर्षक प्रवेश द्वार ने न केवल मंदिर की सुंदरता में चार चांद लगाए हैं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था को भी नई ऊंचाई दी है. आगामी 23 जून को होने वाले मां नयना देवी मंदिर के स्थापना दिवस को लेकर मंदिर ट्रस्ट ने तैयारियां तेज कर दी हैं. मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया जा रहा है और पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल देखने को मिल रहा है.
मंदिर के अमर उदय ट्रस्ट के अध्यक्ष राजीव लोचन साह ने बताया कि स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में 15 जून से 23 जून तक नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है. प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा श्रवण कर रहे हैं. ट्रस्ट का अनुमान है कि स्थापना दिवस के दिन हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचेंगे. इसे देखते हुए मंदिर परिसर में विशेष सजावट के साथ सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि भक्तों को आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण का अनुभव हो सके.
स्थापना दिवस पर भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट ने सुरक्षा और सुचारु दर्शन व्यवस्था के लिए विशेष प्रबंध किए हैं. पहली बार मंदिर का निकास द्वार भी श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए खोल दिया गया है, जिससे भीड़ नियंत्रण में मदद मिलेगी और दर्शन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित रहेगी. मंदिर परिसर की स्वच्छता बनाए रखने के लिए जूते-चप्पल रखने की व्यवस्था मंदिर के बाहर की गई है. ट्रस्ट ने सभी श्रद्धालुओं से व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है.
23 जून को पूरे दिन होंगे धार्मिक आयोजन
राजीव लोचन साह ने बताया कि 23 जून को स्थापना दिवस के अवसर पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में मां नयना देवी की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी. इसके बाद सुबह 7 बजे से कुल पूजा का आयोजन होगा. सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक देव पूजन एवं पूर्णाहुति, दोपहर 12 से 1 बजे तक व्यास पूजन, पुस्तक पूजन और कन्या पूजन संपन्न होगा. इसके बाद विशाल महाभंडारे का आयोजन किया जाएगा. शाम 5 बजे से 7 बजे तक भजन संध्या आयोजित होगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है.
सदियों पुराना है इतिहास
मां नयना देवी मंदिर उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से माता सती का बायां नेत्र इसी स्थान पर गिरा था. तभी से यह स्थान शक्तिपीठ के रूप में पूजनीय माना जाता है. मंदिर के इतिहास का पहला उल्लेख 15वीं शताब्दी में मिलता है. पहले यह मंदिर बोट हाउस क्लब के समीप स्थित था, लेकिन 1880 में आए भयानक भूस्खलन के कारण यह मंदिर मलवे में दब गया. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मोती राम शाह नामक एक भक्त को मां ने स्वप्न में दर्शन देकर बताया था कि उनकी प्रतिमा इस स्थान पर दबी है, जहां वर्तमान मंदिर स्थित है. इसके बाद यहां खुदाई कर प्रतिमा को बाहर निकाला गया और मंदिर की वर्तमान स्थान पर विधिवत स्थापना की गई. तभी से यह मंदिर नैनीताल की धार्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
आज भी स्थापना दिवस के अवसर पर मोती राम शाह के वंशजों को विशेष परंपरा के तहत मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर मां की पूजा-अर्चना करने का अवसर दिया जाता है. सामान्य दिनों में गर्भगृह में केवल अधिकृत पुजारी ही प्रवेश कर सकते हैं. स्थापना दिवस को लेकर पूरे नैनीताल में उत्साह का माहौल है. नए भव्य प्रवेश द्वार, सजी-धजी मंदिर सजावट और धार्मिक आयोजनों के बीच इस बार मां नयना देवी मंदिर रात के समय और जगमगा रहा है.

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