सलूम्बर: जर्जर भवन ढहाने के डेढ़ साल बाद भी नए स्कूल का इंतजार, अस्थायी कमरे में भविष्य संवार रहे 21 मासूम
सलूम्बर। राजस्थान सरकार के शिक्षा में सुधार के दावों के बीच सलूम्बर जिले की ग्राम पंचायत बस्सी सामचोत से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहाँ स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय, अंगारी फला पिछले करीब डेढ़ साल से बिना किसी स्थायी भवन के संचालित हो रहा है। प्रशासन की अनदेखी का आलम यह है कि पुराने भवन को गिराए जाने के बाद अब तक नए निर्माण की स्वीकृति तक नहीं मिल सकी है।
भवन गिरा, पर उम्मीदें भी ढह गईं
बता दें कि वर्ष 2024 में विद्यालय के पुराने भवन को जर्जर घोषित कर उसे गिराने का आदेश दिया गया था। इसके बाद अक्टूबर 2025 में भवन को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। तब से अब तक स्कूल एक अस्थायी जगह पर चल रहा है, जहाँ संसाधनों की भारी कमी है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
विद्यालय में वर्तमान में 21 बच्चे नामांकित हैं। डेढ़ साल से अस्थायी व्यवस्था में पढ़ाई करने के कारण इन मासूमों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है:
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सीमित संसाधन: कक्षाओं के लिए पर्याप्त जगह और बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है।
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सुरक्षा का अभाव: स्थायी परिसर न होने से बच्चों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक माहौल नहीं मिल पा रहा है।
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अभिभावकों की चिंता: स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे बच्चों के मानसिक और शैक्षणिक विकास पर इसका बुरा असर पड़ रहा है।
फंड होने के बावजूद शिक्षा की अनदेखी
ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जिले में एक तरफ DMFT (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) और SDRF फंड के माध्यम से अन्य निर्माण कार्य तेजी से कराए जा रहे हैं, लेकिन बच्चों के स्कूल के लिए बजट जारी नहीं किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दे को प्राथमिकता नहीं दे रहा है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
बस्सी सामचोत के पीईईओ मुकेश भगवान त्रिवेदी ने बताया कि विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति और नए भवन की मांग को लेकर विभाग और जिला प्रशासन को कई बार लिखित में सूचित किया जा चुका है। पत्र व्यवहार के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से नए भवन को लेकर कोई ठोस कार्रवाई या स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है।
ग्रामीणों की मांग: स्थानीय निवासियों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल नए विद्यालय भवन के निर्माण की मंजूरी दी जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द ही समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

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