नई दिल्ली। भारतीय सेना ने भविष्य के युद्धों की रणनीति के तहत खुद को अभूतपूर्व रूप से तैयार करने में लगी है। इसी कड़ी में बाज बटालियन नाम से विशेष ड्रोन यूनिट बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। यह बटालियन सेना की आर्मी एविएशन कॉर्प्स के तहत कार्य करेगी, जिसका मुख्य उद्देश्य सीमा पर चौबीसों घंटे लगातार निगरानी रखना, दुश्मन की गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और आवश्यकता पड़ने पर सटीक कार्रवाई में सेना को मदद करना है। पिछले दिनों सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की और स्पष्ट किया कि आने वाले समय में ड्रोन युद्ध का एक सबसे अहम और निर्णायक हिस्सा बनेगा।
भारतीय सेना ने चीन के साथ एलएसी पर लंबे सैन्य तनाव और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन के प्रभावी इस्तेमाल से कई अहम सबक सीखे हैं। इन्हीं अनुभवों ने महसूस कराया कि लंबी दूरी तक निगरानी और बड़े पैमाने पर ड्रोन संचालन के लिए अलग विशेषज्ञ इकाई का होना जरुरी है। प्रथमदृष्टा समझा जा रहा है कि बाज बटालियन इस जरूरत को पूरा कर सकेगी, जो सेना को बड़ी संख्या में नए ड्रोन, उनकी लगातार अपग्रेडिंग और उन्हें कुशलता से संचालित करने वाले प्रशिक्षित जवानों से लैस करेगी। इसका अहम कदम से दुश्मन की हर चाल पर पैनी नजर रखना और तुरंत सेना को जानकारी उपलब्ध कराना आसान होगा।
बटालियन में अमेरिका के अत्याधुनिक ड्रोन होंगे शामिल
इस नई बटालियन में अमेरिका के अत्याधुनिक एमक्यू-9बी स्काईगार्डियन जैसे लंबी दूरी के ड्रोन शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा, इजरायल के हेरोन और हैरमैस जैसे उच्च तकनीक वाले ड्रोन भी यूनिटों का हिस्सा बनने वाले है। सेना आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रही है, इसलिए स्वदेशी कंपनियों द्वारा बनाए गए आधुनिक ड्रोन भी इसमें शामिल किए जाएंगे। वर्तमान में, सेना की अशिनी ड्रोन पलटन पैदल सेना के साथ मिलकर कम दूरी की निगरानी करती है, जबकि दिव्यास्त्र और शक्तिबाण जैसी इकाइयां हमलावर ड्रोन का उपयोग करती हैं। बाज बटालियन इन सबसे ऊपर की श्रेणी में होगी, जो लंबी दूरी की व्यापक निगरानी, लक्ष्य पहचान और बड़े स्तर पर ड्रोन संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी।
कई गुना बढ़ जाएगी सेना की क्षमता
बाज बटालियन के गठन से भारतीय सेना की इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (आईएसआर) क्षमता में कई गुना वृद्धि होगी। यह सीमाओं पर 24 घंटे निरंतर सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, जिससे सेना को तेजी से सामरिक निर्णय लेने और जरूरत पड़ने पर तुरंत प्रभावी जवाबी कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। यह पहल भविष्य की जंग में भारत की सैन्य ताकत को मजबूती देगी और दुश्मन की हर चुनौती का सामना करने में सक्षम बनाएगी।

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