जयपुर। बांसवाड़ा जिले के सुदूर आदिवासी अंचल में स्थित चुड़ादा गाँव में रात्रि चौपाल लगाने के बाद मुख्यमंत्री गुरुवार सुबह फिर से ग्रामीणों के बीच पहुँचे। उन्होंने गांव की गलियों में भ्रमण करते हुए स्थानीय लोगों से संवाद किया और जन-मन की बात जानी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के विचार को साकार करने के लिए कार्य कर रही है। ग्राम विकास चौपाल उसी अंत्योदय दर्शन का जीवंत स्वरूप है। जहां अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक योजनाओं और विकास का लाभ पहुंचाना सरकार की पहली प्राथमिकता है।
पीपल के नीचे लगाई चौपाल, सुने लोगों के अभाव-अभियोग
भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने पीपल के पेड़ के नीचे चौपाल लगाई और लोगों के अभाव-अभियोग सुनें। इस दौरान उन्होंने पानी से जुड़े विभिन्न मामलों पर संज्ञान लेते हुए जिला कलक्टर को सिंचाई के लिए हीरन नदी पर एनिकट निर्माण एवं पेयजल स्त्रोतों के लिए निर्देश दिए। इसके बाद वे मां बाड़ी केंद्र पहुंचकर बच्चों से मिले तथा उनकोे दुलार किया। भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने जगह-जगह रूककर बच्चों को उपहार स्वरूप चॉकलेट बाँटी तथा उन्हें पढ़-लिखकर उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री से चॉकलेट पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे। साथ ही, उन्होंने ग्रामीणों से अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने तथा युवाओं को नशे की लत से दूर रखने के लिए भी आह्वान किया।
कार्य में लापरवाही बरतने वाले कार्मिकों पर मुख्यमंत्री सख्त
इस दौरान कार्मिकों द्वारा कुशलगढ़ के खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गिरिश भाभोर के विरूद्ध वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत की गई। इस पर मुख्यमंत्री ने गंभीरता दिखाते हुए अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर चिकित्सा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डॉ. गिरिश भाभोर कोे एपीओ कर दिया।
पानी का कोई विकल्प नहीं, हर बूंद का सदुपयोग जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी का कोई विकल्प नहीं है, इसलिए प्रत्येक बूंद को बचाना और उसका समुचित उपयोग करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। फलदार वृक्ष पर्यावरण संरक्षण के साथ अतिरिक्त आय का भी बड़ा माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने किसानों से माइक्रो सिंचाई, वर्षा जल संग्रहण, आधुनिक एवं बहुआयामी खेती, डिग्गी निर्माण पर भी विशेष ध्यान देने की अपील की।
जल संरक्षण को बनाए जन आंदोलन
उन्होंने कहा कि किसानों को पारंपरिक खेती के साथ पशुपालन को भी जोड़ना होगा, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सके। मेहनत और नवाचार के माध्यम से खेती को लाभदायक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गांवों में ही रोजगार और आय के अवसर विकसित कर युवाओं को बाहर मजदूरी के लिए जाने से रोका जा सकता है। उन्होंने डूंगरपुर क्षेत्र में सामुदायिक सहभागिता से किए गए जल संरक्षण कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब गांव मिलकर जल स्रोतों को सहेजते हैं तो उसका लाभ पूरे क्षेत्र को मिलता है। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने मौके पर ही किया मांगों का समाधान
इसके बाद मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से चाय पर चर्चा करते हुए उनकी मांगों का समाधान किया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गांव ठुम्मठ में मां बाड़ी केंद्र निर्माण के लिए 16.20 लाख रुपये, ठुम्मठ चौराहा पर सिंगल फेज ट्यूबवेल निर्माण के लिए 20 लाख रुपये तथा ग्राम चुड़ादा में मामा बालेश्वर दयाल मंदिर परिसर में इंटरलॉकिंग एवं सौंदर्यीकरण के लिए 7 लाख रूपये की तत्काल स्वीकृति भी जारी कर दी गई। साथ ही, मुख्यमंत्री ने राजकीय विद्यालय में दो कक्षा-कक्षों के निर्माण एवं गाँव के समीप दूध संकलन केन्द्र की स्थापना को लेकर भी अधिकारियों को निर्देशित किया। इससे पहले भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री को रोशनी कलाल ने सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित अपने पुत्र की बीमारी को ध्यान में रखते हुए अपने पति हेमेंद्र कुमार कलाल (सहायक अभियंता) का पदस्थापन जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग कार्यालय सागवाड़ा से बांसवाड़ा करने का अनुरोध किया। इस पर मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए हेमंत कुमार कलाल का पदस्थापन कार्यालय अधिशासी अभियंता परियोजना खंड बांसवाड़ा में करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने भी निर्देशों की अनुपालना में शीघ्र कार्रवाई कर इसके आदेश जारी कर दिए। इससे पहले मुख्यमंत्री ने संत मामा बालेश्वर दयाल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। इस अवसर पर जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी, राजस्व मंत्री हेमंत मीणा, सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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