मुंबई: देश की राजनीति में चर्चा का विषय बने विवादित परिसीमन विधेयक को लेकर एक बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आ रहा है। यह वही विधेयक है जिसे केंद्र सरकार बीते अप्रैल महीने में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत की कमी के चलते संसद में पारित कराने में विफल रही थी। अब इस मुद्दे पर शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के रुख में नरमी के संकेत मिल रहे हैं, जिससे इस बिल को लेकर नए समीकरण बनते दिख रहे हैं।
सुप्रिया सुले ने दिए रुख बदलने के संकेत
पार्टी की वरिष्ठ नेता और सांसद सुप्रिया सुले ने बुधवार को इस बात का इशारा किया है कि यदि केंद्र सरकार इस विधेयक में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करने के लिए तैयार होती है, तो उनकी पार्टी इस पर सकारात्मक विचार कर सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार विभिन्न राज्यों में लोकसभा और विधानसभा की सीटों में 50 फीसदी तक की वृद्धि करने संबंधी कोई बड़ा संशोधन बिल में शामिल करती है, तो एनसीपी (शरद पवार) इस कानून को पारित कराने में सरकार को अपना सहयोग दे सकती है।
संसद में गिर चुके विधेयक को लेकर नई सुगबुगाहट
गौरतलब है कि पिछली बार विपक्षी दलों के कड़े विरोध और आवश्यक संख्या बल न होने के कारण यह परिसीमन बिल कानून का रूप नहीं ले सका था। लेकिन सुप्रिया सुले के इस ताजा बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात की सुगबुगाहट तेज हो गई है कि क्या सरकार विपक्षी दलों की मांगों को ध्यान में रखकर बिल का नया प्रारूप तैयार करेगी। यदि ऐसा होता है, तो आगामी सत्रों में इस बिल को लेकर संसद में एक नया मोड़ देखने को मिल सकता है।

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