September 16, 2026

पुलिस ज्यादती की जांच वाली कमेटी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, नहीं होगा पुनर्गठन

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती की जांच के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPEC) में बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत का कहना है कि समिति के सदस्यों के खिलाफ उठाए गए सवाल केवल अटकलों और पूर्वाग्रहों पर आधारित हैं। यह फैसला न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनाया है।

जांच के दायरे में पैलेट गन और दुर्व्यवहार के मामले

सर्वोच्च न्यायालय ने HPEC को निर्देश दिया है कि वह प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल, लक्षित हिंसा, और महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न से जुड़े मामलों की गहराई से जांच करे। इसके साथ ही, अदालत ने प्रदर्शनकारियों और पुलिस दोनों पक्षों की तरफ से हुई अत्यधिक हिंसा तथा सार्वजनिक संपत्ति को पहुंचे नुकसान के पहलुओं की भी निष्पक्ष जांच करने को कहा है।

संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा और गोपनीयता

गवाहों की सुरक्षा को लेकर जताई गई चिंताओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए पीठ ने स्पष्ट किया कि संवेदनशील गवाहों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जानी चाहिए। समिति के सामने बयान देने वाले ऐसे लोगों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि गवाहों और संबंधित पक्षों की सुविधा के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाए, जिसके जरिए वे आसानी से अपने दस्तावेज और साक्ष्य सुरक्षित रूप से जमा कर सकें।

स्वतंत्र मध्यस्थ की भूमिका और प्रशासनिक व्यवस्था

अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता मोनिका गुसैन और अधिवक्ता सी. सोलोमन को HPEC का प्रतिनिधि नियुक्त किया है, जो अदालत की सहायता के साथ-साथ दोनों पक्षों के बीच एक स्वतंत्र मध्यस्थ के रूप में भी कार्य करेंगे। इसके अलावा, पीठ ने समिति को जल्द से जल्द एक सदस्य सचिव नियुक्त करने का आग्रह किया है ताकि प्रशासनिक और सचिवालय से जुड़े कार्य सुचारू रूप से चल सकें।

याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां और कोर्ट का रुख

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों ने समिति के एक सदस्य (मेघालय के पूर्व डीजीपी) पर हितों के टकराव का आरोप लगाया था। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन दलीलों का कड़ा विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने इन आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली इस समिति का गठन सदस्यों के व्यापक अनुभव, विशेषज्ञता और विविधता को ध्यान में रखकर किया गया है। इस समिति में पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, पूर्व न्यायाधीश शालिंदर कौर और पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला भी शामिल हैं।