मुरैना में सुप्रीम कोर्ट के आदेश बेअसर: चंबल नदी में रातभर बेखौफ चलता रहा अवैध रेत खनन

मुरैना | चंबल नदी में गैर-कानूनी बालू उत्खनन पर पूरी तरह लगाम कसने के लिए सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) और स्थानीय प्रशासन द्वारा समय-समय पर सख्त गाइडलाइन जारी की जा रही हैं। इन कड़े आदेशों के बाद भी धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है और रेत माफिया बिना किसी खौफ के नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र की सुरक्षा को ताक पर रखकर प्रतिबंधित इलाकों से धड़ल्ले से की जा रही रेत की चोरी ने प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है।

रायपुर घाट पर रातभर चलीं लोडर मशीनें, बड़े पैमाने पर हुआ बालू का अवैध दोहन

चंबल घड़ियाल परियोजना के तहत आने वाले अंबाह वन परिक्षेत्र के रायपुर घाट पर बीती रात माफियाओं का बड़ा दुस्साहस देखने को मिला। नदी के तटीय हिस्से में देर रात भारी लोडर मशीनें उतारकर बड़े पैमाने पर बालू को निकाला गया। स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के मुताबिक, यह अवैध कारोबार पूरी रात बिना किसी रुकावट के चलता रहा। माफियाओं ने चंबल की छाती चीरकर सैकड़ों ट्रॉली रेत निकाली और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों तथा डंपरों के जरिए उसे सुरक्षित ठिकानों पर सप्लाय भी कर दिया, जबकि गश्ती दल को इसकी भनक तक नहीं लगी।

मिलीभगत की आशंका: वन विभाग के कर्मचारी के संरक्षण में खनन के आरोप

इस पूरे गोरखधंधे के पीछे वन विभाग के ही कुछ मैदानी अमले की सांठगांठ होने की खबरें क्षेत्र में तैर रही हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसी चर्चाएं गर्म हैं कि बीट पर तैनात वनरक्षक (फॉरेस्ट गार्ड) कृष्णा के कथित संरक्षण और शह के चलते ही रेत चोर इतनी बड़ी वारदात को बेखौफ अंजाम देने में सफल रहे। हालांकि, इस अंदरूनी मिलीभगत को लेकर वन विभाग के किसी भी आला अधिकारी ने अभी तक कोई अधिकारिक बयान या पुष्टि नहीं की है, लेकिन मामले को लेकर महकमे के भीतर सुगबुगाहट तेज हो गई है।

पर्यावरण और जलीय जीवों पर मंडराया संकट, ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

चंबल नदी की रेत में घड़ियालों और कछुओं के प्राकृतिक आवास हैं, जिन्हें इस अनियंत्रित अवैध खनन से अपूरणीय क्षति पहुंच रही है। नदी के स्वरूप और पर्यावरण को हो रहे इस बड़े नुकसान से आक्रोशित होकर क्षेत्रीय नागरिकों ने प्रशासन से गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मामले की किसी वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि रक्षक की आड़ में भक्षक बने विभागीय कर्मचारियों और माफियाओं के गठजोड़ को बेनकाब कर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।