August 31, 2026

गोवा नाइटक्लब फायर केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त, जमानत रद्द करने का हाई कोर्ट का आदेश बरकरार

नई दिल्ली | देश के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने सोमवार को बहुचर्चित 2025 गोवा नाइटक्लब अग्निकांड मामले में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए तीनों मुख्य आरोपियों की जमानत रद्द करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। सनद रहे कि इस भयावह अग्निकांड की दुर्घटना में कुल 25 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की विशेष पीठ ने नाइटक्लब के मालिक सौरव लूथरा, गौरव लूथरा और उनके व्यावसायिक साझेदार अजय गुप्ता की याचिका को ठुकराते हुए उन्हें आगामी दो सप्ताह के भीतर अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का सख्त निर्देश दिया है।

शीर्ष अदालत ने निचली अदालत को दिए त्वरित सुनवाई के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) को यह भी निर्देश दिया है कि वह इस संवेदनशील आपराधिक मामले की सुनवाई में तेजी लाए और बिना किसी विलंब के कार्यवाही पूरी करे। गौरतलब है कि 6 दिसंबर 2025 को गोवा के अर्पोरा स्थित प्रसिद्ध 'बिर्च बाय रोमियो लेन' नाइटक्लब में एक भीषण आग भड़क उठी थी, जिसमें 25 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और करीब 50 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने किस आधार पर रद्द की थी जमानत?

इससे पहले 18 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक कड़े फैसले में तीनों आरोपियों की जमानत को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि निचली अदालत ने पुलिस जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों और सामग्रियों पर विवेकपूर्ण तरीके से विचार नहीं किया था। इसके अलावा, यह मानने में भी गंभीर भूल की थी कि यह अपराध भारतीय न्याय संहिता के तहत हत्या या अन्य गंभीर अपराधों की श्रेणी में नहीं आता है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि रिकॉर्ड पर मौजूद पुख्ता दस्तावेजों से यह साफ जाहिर होता है कि उक्त रेस्तरां और नाइटक्लब बिना किसी आवश्यक वैध लाइसेंस के संचालित किया जा रहा था और उसका पूरा ढांचा पूरी तरह से अनधिकृत (अवैध) था। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि आरोपियों और उनके साझेदारों को इस बात की पूरी जानकारी थी कि परिसर में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा उपायों के बिना इस तरह के खतरनाक प्रदर्शन करना कितने बड़े जोखिम को न्योता देना है।

क्या है पूरा मामला और कारोबारी साझेदारी?

लूथरा बंधु (सौरव और गौरव) तथा अजय गुप्ता 'एम/एस बीइंग जीएस हॉस्पिटैलिटी अर्पोरा एलएलपी' नामक कंपनी के साझेदार (पार्टनर) थे, जिसके बैनर तले इस नाइटक्लब का संचालन किया जाता था। इस साल अप्रैल में निचली अदालत ने इन तीनों आरोपियों को जमानत दे दी थी, जिसे गोवा सरकार ने चुनौती देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने सरकार की याचिका स्वीकार करते हुए आरोपियों की जमानत रद्द की थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी पूरी तरह से सही ठहराया है।