मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संगठनात्मक पुनर्गठन और प्रदेश नेतृत्व में बदलाव को लेकर जारी कयासों पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार की अगुवाई में पार्टी भले ही भविष्य की रूपरेखा तैयार कर रही हो, पर महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे को पदमुक्त करने का निर्णय टाल दिया गया है। अजित पवार के दुखद निधन के बाद पार्टी आलाकमान किसी भी नए आंतरिक मतभेद से बचते हुए सांगठनिक संतुलन बनाए रखना चाहता है।
प्रशांत किशोर से भेंट के बाद उपजी थीं कयासबाजियां
हाल के दिनों में NCP के प्रांतीय नेतृत्व में फेरबदल की सरगर्मियां काफी तेज थीं। सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार की राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ हुई बैठक के बाद नए समीकरणों की चर्चा ने जोर पकड़ा था। हालांकि, पार्थ पवार ने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया था कि प्रशांत किशोर उनके पारिवारिक मित्र हैं और यह एक विशुद्ध अनौपचारिक मुलाकात थी।
तटकरे की पुनर्नियुक्ति और संगठन के भीतर उठते सवाल
अजित पवार के असमय जाने के पश्चात NCP अपनी सांगठनिक संरचना को पुनर्गठित कर रही है। फरवरी 2026 में जब सुनेत्रा पवार ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान संभाली, उसी दौरान सुनील तटकरे को दोबारा महाराष्ट्र इकाई का अध्यक्ष चुना गया था। यद्यपि पार्टी के कुछ अंदरूनी गुटों में तटकरे की कार्यशैली को लेकर असंतोष उभरा और नेता भाऊसाहेब गोरे ने इस चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ निर्वाचन आयोग का दरवाजा भी खटखटाया, फिर भी तटकरे पार्टी के प्रमुख निर्णयों और कार्यक्रमों में मजबूती से डटे हुए हैं।
अध्यक्ष पद की होड़ में उभरे दो विकल्प
संगठन में संभावित बदलाव को लेकर दो वरिष्ठ व युवा चेहरों के नामों की सुगबुगाहट तेज हुई थी। इनमें पहले दिलीप वलसे पाटील हैं, जो गृह, वित्त और ऊर्जा जैसे विभागों का अनुभव रखने के साथ 2009 से 2014 तक विधानसभा अध्यक्ष भी रह चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने सुनेत्रा पवार के समक्ष प्रशासनिक पदों के बजाय संगठन को समय देने की इच्छा जताई है। दूसरा नाम अमलनेर से युवा विधायक अनिल भैदास पाटील का उभरा, जिनकी सहकारिता क्षेत्र में अच्छी पकड़ मानी जाती है, हालांकि उन्होंने स्वयं को इस रेस से बाहर बताया है।
अजित पवार के बाद NCP में शक्ति संतुलन का समीकरण
जनवरी 2026 में हुए दर्दनाक विमान हादसे में अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने सर्वसम्मति से पार्टी की बागडोर संभाली। वर्तमान परिस्थितियों में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार के साथ-साथ प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे चार दशक का अनुभव रखने वाले दिग्गज नेताओं का समन्वय पार्टी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी राजनीतिक अनुभव और तंत्र को ध्यान में रखते हुए नेतृत्व ने फिलहाल किसी त्वरित बदलाव के बजाय पुराने सांगठनिक ढांचे की निरन्तरता को ही प्राथमिकता दी है।

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