November 7, 2026

यूपी में नाबालिग से दुष्कर्म मामले में सख्त फैसला, आरोपी को उम्रकैद नहीं बल्कि 20 साल की कैद

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने दस साल की मासूम बच्ची के साथ घर में घुसकर दुष्कर्म करने के बहुचर्चित मामले में कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने पड़ोसी और दोषी करार दिए गए आरोपी आरिफ अंसारी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। गत 10 अगस्त 2024 को जैतपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत घटित इस जघन्य वारदात में आरोपी ने घर में अकेली बालिका को अपनी हवस का शिकार बनाया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोषी पर पचास हजार रुपये का अर्थदंड भी अधिरोपित किया है।

वारदात का विवरण और मां के पहुंचने पर आरोपी की فراری (फरारी)

अभियोजन पक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 10 अगस्त 2024 को शाम करीब चार बजे की है, जब पीड़िता अपने घर पर अकेली थी और उसकी माताजी छत पर घरेलू कार्यों में व्यस्त थीं। इसी बीच पड़ोस में रहने वाला आरोपी आरिफ अंसारी चुपचाप घर के भीतर घुस आया और मासूम बच्ची को जबरन उठाकर बाथरूम में ले गया, जहां उसने उसके साथ दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। कुछ ही देर में जब बच्ची के रोने और चिल्लाने की आवाज सुनकर उसकी मां नीचे पहुंचीं, तो आरोपी ने उन्हें भी धक्का दे दिया और मौके से भाग निकला। भागने से पहले खौफजदा आरोपी ने बच्ची को मुंह बंद रखने के लिए पच्चीस रुपये का प्रलोभन दिया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी। इस संबंध में मृतका के परिजनों की शिकायत पर जैतपुरा थाने में सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

अदालत में सुनवाई और गवाहों के आधार पर सजा

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) नितिन पांडेय की अदालत में संपूर्ण सुनवाई संपन्न हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह द्वारा की गई। न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से पीड़िता और उसकी मां सहित कुल पांच महत्वपूर्ण गवाह पेश किए गए, जिनमें डॉक्टर और विवेचना करने वाले पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। अदालत ने मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट, गवाहों के पुख्ता बयाम और पत्रावली पर उपलब्ध तमाम अकाट्य साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन करने के पश्चात आरोपी आरिफ अंसारी को इस कुकृत्य का पूर्णतः दोषी ठहराया।

जुर्माने की आधी राशि पीड़िता को देने के निर्देश

विशेष पॉक्सो कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आरोपी पर लगाए गए पचास हजार रुपये के कुल जुर्माने में से आधी यानी पच्चीस हजार रुपये की धनराशि बतौर प्रतिकर (मुआवजा) पीड़िता को प्रदान की जाएगी। इस सख्त न्यायिक फैसले से समाज में न्याय की उम्मीद को बल मिला है और बाल अपराधों के प्रति अदालत की जीरो टॉलरेंस नीति का एक मजबूत संदेश प्रसारित हुआ है।