मुंबई | घरेलू शेयर बाजार के दोनों मुख्य सूचकांकों, सेंसेक्स और निफ्टी में गुरुवार को शुरुआती सत्र के दौरान कमजोरी देखने को मिली। बाजार में आई इस गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सुस्त संकेत, पश्चिम एशिया में गहराया भू-राजनीतिक संकट और विदेशी निवेशकों द्वारा घरेलू बाजार से लगातार पैसे खींचा जाना प्रमुख वजह रहे। कारोबार की शुरुआत में उतार-चढ़ाव के बीच 30 शेयरों पर आधारित बीएसई (BSE) सेंसेक्स 229.69 अंक टूटकर 74,139.32 के स्तर पर आ गया, जबकि 50 शेयरों वाला एनएसई (NSE) निफ्टी भी 66.30 अंकों की मंदी के साथ 23,339 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। हालांकि, इस उठापटक के बीच कुछ समय के लिए बाजार में मामूली सुधार भी देखा गया।
दिग्गज शेयरों में बिकवाली और विदेशी निवेशकों का बाजार से किनारा
सेंसेक्स की शीर्ष 30 कंपनियों में ट्रेंट, इंफोसिस, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक और टाटा स्टील जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर घाटे के साथ लाल निशान पर कारोबार कर रहे थे। इसके विपरीत इटरनल, टाइटन, अदानी पोर्ट्स और टेक महिंद्रा के शेयरों में लिवाली देखने को मिली और वे बढ़त बनाने में कामयाब रहे। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बीते सत्र यानी बुधवार को ही 5,616.56 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे थे, जिसका सीधा असर आज के बाजार पर दिखा। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.97 प्रतिशत गिरकर 96.86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख और एशियाई सूचकांकों में गिरावट
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला समय चुनौतियों से भरा रह सकता है। अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे विदेशी बाजारों की मजबूती भारतीय बाजार से और ज्यादा विदेशी निवेश (FPI) बाहर निकलने का कारण बन सकती है। आज के कारोबार में एशियाई बाजारों की बात करें तो दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी गिरावट के दबाव में नजर आए। इसके अलावा, बीते बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी गिरावट के साथ ही बंद हुए थे, जिससे वैश्विक स्तर पर धारणा कमजोर हुई।
पश्चिम एशिया का तनाव और निवेशकों की बढ़ती चिंताएं
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इजराइल और लेबनान के मध्य युद्धविराम को लेकर हुए नए समझौतों ने कुछ हद तक राहत जरूर दी है, लेकिन पश्चिम एशिया की बड़ी और बुनियादी समस्याएं अब भी बरकरार हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता गतिरोध तथा हालिया हमलों के बाद ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई के अंदेशे ने बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। भू-राजनीतिक स्तर पर किसी ठोस और स्थायी कूटनीतिक समाधान के न मिलने से बाजार अंतरराष्ट्रीय खबरों के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है, जिसका सीधा असर आने वाले समय में ईंधन की कीमतों और वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।

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