नई दिल्ली। दिल्ली में लगातार बढ़ रही आबादी के बीच गहराते जल संकट को दूर करने के लिए किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना एक बड़ी राहत साबित हो सकती है। छह राज्यों के बीच हुए अंतरराज्यीय समझौते के तहत दिल्ली को इस प्रोजेक्ट से 109.9 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) यानी लगभग 30 करोड़ लीटर (80 एमजीडी) अतिरिक्त पानी प्रतिदिन मिलेगा।
32 फीसदी तक कम होगी पानी की कमी
राजधानी में फिलहाल 1250 एमजीडी पानी की मांग के मुकाबले 1000 एमजीडी की आपूर्ति हो रही है, जिससे 250 एमजीडी की कमी बनी हुई है। किशाऊ प्रोजेक्ट से 80 एमजीडी पानी मिलने पर दिल्ली का करीब 32 प्रतिशत जल संकट दूर हो जाएगा। इससे कुल जलापूर्ति बढ़कर 1080 एमजीडी हो जाएगी और मांग-आपूर्ति का अंतर घटकर 170 एमजीडी रह जाएगा।
2033 तक पूरा होने की संभावना
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी और निर्माण से पहले की प्रक्रियाओं के कारण इस परियोजना को पूरा होने में लगभग सात साल लग सकते हैं। अनुमान जताया जा रहा है कि दिल्ली को 2033 तक ही इस प्रोजेक्ट से पानी मिल पाएगा।
90 फीसदी लागत उठाएगी केंद्र सरकार
इस परियोजना के जल घटक की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत खर्च छह भागीदार राज्य मिलकर उठाएंगे। मार्च 2018 के मूल्यांकन के अनुसार किशाऊ परियोजना की कुल लागत 11,550 करोड़ रुपये आंकी गई थी। दिल्ली सरकार इसके लिए 8.1 करोड़ रुपये की बीज राशि जमा करा चुकी है।
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स को मिलेगा फायदा
टोंस नदी (यमुना की सहायक नदी) पर बनने वाले किशाऊ बांध से पानी छोड़कर उसे ताजेवाला हेडवर्क्स और यमुना नहर तंत्र के जरिए दिल्ली तक लाया जाएगा। अतिरिक्त कच्चा पानी उपलब्ध होने से वजीराबाद, चंद्रावल और हैदरपुर जैसे प्रमुख जल शोधन संयंत्रों (WTP) पर दबाव काफी कम होगा।
यमुना के पुनर्जीवन में मिलेगी मदद
यह परियोजना सिर्फ पानी की आपूर्ति ही नहीं बढ़ाएगी, बल्कि हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी का उपयोग दिल्ली और राजस्थान के लिए करने से यमुना नदी में स्वच्छ पानी का प्रवाह बढ़ेगा। इससे प्रदूषित हो चुकी यमुना के पुनरुद्धार में काफी मदद मिलेगी।

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