October 8, 2026

प्रमोशन से ठीक पहले थम गई जवान की सांसें, 22 साल सेना को दी सेवा, आज अंतिम विदाई

चित्तौड़गढ़. जिले के गंगरार इलाके के सूरत सिंहजी का खेड़ा गांव निवासी हवलदार जितेंद्र सिंह चौहान का असम में डयूटी के दौरान निधन हो गया है। वे मात्र इकतालीस वर्ष के थे और असम में ६२९ साटा बैटरी यूनिट में आरटी हवलदार के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। परिवार को सेना की ओर से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, डयूटी के दौरान अचानक उनका ऑक्सीजन लेवल काफी कम हो गया था, जिसके बाद उन्हें गंभीर हार्ट अटैक आया और उनका निधन हो गया।

प्रमोशन से ठीक पहले आया दुखद समाचार

दिवंगत हवलदार जितेंद्र सिंह चौहान ने भारतीय सेना में लगभग बाईस वर्षों तक पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ देश की सेवा की थी। उनके परिवार और सहकर्मियों के अनुसार, अगले पच्चीस दिनों के भीतर उनका प्रमोशन होने वाला था, जिसके तहत वे हवलदार से पदोन्नत होकर नायब सूबेदार बनने वाले थे। हालांकि, इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से ठीक पहले उनके निधन की इस मनहूस खबर ने उनके परिवार, रिश्तेदारों और पूरे गांव को गहरे सदमे और शोक में डुबो दिया है।

पैतृक गांव में होगा पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

असम में पोस्टमॉर्टम और सेना से जुड़ी सभी आवश्यक कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उनका पार्थिव शरीर राजस्थान लाया जा रहा है। प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उनके पार्थिव शरीर को एयर एम्बुलेंस के माध्यम से लाने की विशेष तैयारी की गई है। इसके बाद नसीराबाद छावनी की विशेष टीम पार्थिव शरीर को लेकर उनके पैतृक गांव सूरत सिंहजी का खेड़ा पहुंचेगी। जवान के आगमन की सूचना मिलते ही गांव में अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं, जिसमें श्मशान स्थल की साफ-सफाई और अन्य जरूरी इंतजाम शामिल हैं।

भरा-पूरा परिवार और जनप्रतिनिधियों की संवेदनाएं

दिवंगत जितेंद्र सिंह के परिवार में उनके माता-पिता, उनकी पत्नी और दो छोटी बेटियां हैं। उनकी बड़ी बेटी का नाम कीर्तिराज है, जबकि छोटी बेटी सौम्या करीब एक वर्ष की मासूम है। उनके छोटे भाई ललित सिंह राजस्थान पुलिस विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। परिवार के लिए उनका इस तरह अचानक चले जाना एक अपूरणीय क्षति है। इस दुखद निधन पर भाजपा नेता सीपी जोशी ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें मां भारती का एक सच्चा और वीर सपूत बताया है। उन्होंने दिवंगत जवान की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोकसंतप्त परिवार को इस असीम दुख को सहने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से कामना की है। गांव के लोगों का कहना है कि वे जब भी छुट्टी पर घर आते थे, तो हमेशा युवाओं को सेना में भर्ती होने और देश सेवा के लिए प्रेरित करते थे। उनके अंतिम संस्कार में पूरे सैन्य सम्मान के साथ क्षेत्र के लोग उन्हें अपनी भीनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।